जच्चा और बच्चा की मौत में जांच कमेटी गठित
बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग सुरक्षित प्रसव के दावे तो खूब कर रहा है, लेकिन पिछले दिनों हुई दो बच्चों और जच्चा की मौत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। एक सप्ताह में स्योहारा और नजीबाबाद में दो प्रसव पीड़िता और एक नवजात की मौत होने के बाद हंगामा भी हुआ और अस्पताल में तोड़फोड़ भी हुई। इसके बाद सीएमओ ने जांच कमेटी भी गठित कर दी, लेकिन बात महिला चिकित्सकों की करें तो कस्बे और तहसील स्तर पर महिला चिकित्सक ही नहीं हैं।
जिले में 11 सीएचसी और 11 पीएचसी हैं। सभी पर गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराया जा रहा है। सीएचसी धामपुर और शमीपुर में ही महिला चिकित्सक तैनात हैं। इसके अलावा अन्य सीएचसी और पीएचसी पर स्टाफ नर्स गर्भवती महिलाओं का प्रसव करा रही हैं। एक सप्ताह के अंदर दो नवजात और प्रसव के दौरान महिला की मौत हो गई। स्योहारा में प्रसव सही नहीं होने की वजह से एक नवजात की मौत हो गई। जबकि नजीबाबाद में जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई। अब सीएमओ ने जांच कमेटी तो गठित कर दी, लेकिन सवाल यह उठ रहे हैं कि ऐसी घटनाओं को रोकने और लोगों में विश्वास जगाने के लिए क्या इंतजाम किए जाएंगे।
सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिला का प्रसव कराने पर जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग इसके लिए लोगों को जागरूक भी कर रहा है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने की पूरी व्यवस्था ही नहीं है। स्वास्थ्य केंद्रों पर महिला चिकित्सकों की कमी के चलते सरकारी अस्पतालों में दो हादसे हो गए। स्योहारा में बच्चे और नजीबाबाद में जच्चा और बच्चा की मौत के बाद सीएमओ ने तीन सदस्य जांच कमेटी गठित की है। जांच कमेटी में एसीएमओ डॉ. पीआर नायर, एसीएमओ डॉ. बीएस रावत, डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद विश्वकर्मा शामिल हैं। जो मामले की जांच कर सीएमओ को रिपोर्ट सौंपेंगे।
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जिले की सभी सीएचसी और पीएचसी पर प्रसव की पूरी व्यवस्था है। कभी-कभी ऐसे हादसे हो जाते हैं। मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। अगर जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी- डॉ. विजय कुमार गोयल, सीएमओ