पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश से गंगा में उफान बरकरार बना हुआ है। बिजनौर बैराज पर शनिवार को भी गंगा की धारा खतरे के निशान को छूकर बहती रही। बालावाली से रावली तक अनेक जगहों पर गंगा लगातार कटान कर रही है। महाभारतकालीन गलखा देवी मंदिर के पास तक गंगा की धारा कटान करते हुए पहुंच चुकी है। हालांकि मालन शांत हो गई और जलस्तर में कमी आई है।
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शनिवार को बिजनौर बैराज पर गंगा का जलस्तर 219.80 मीटर दर्ज किया गया। सुबह बैराज से गंगा में एक लाख 64 हजार क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया था जबकि शाम चार बजे कमी करते हुए करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। पहाड़ और मैदानी इलाकों में लगातार बारिश से गंगा और सहायक नदियों में उफान बना हुआ है। हालांकि हरिद्वार बैराज से पानी कम छोड़ा जा रहा है, लेकिन सहायक नदियों के उफान से गंगा का जलस्तर बढ़ा हुआ है। गंगा में उफान से जिले में बाढ़ के हालात हो गए। वहीं जलीलपुर क्षेत्र के आठ गांव में अभी तक बाढ़ का पानी भरा हुआ है। उधर मंडावर थाना क्षेत्र के कई गांव में गंगा जमीनों का कटान कर रही है।
टूटने से बच गया मालन का तटबंध
शुक्रवार की शाम से ही मालन नदी का जलस्तर बढ़ने लगा तो लोगों के दिलों की धड़कनें तेज हो गई। पानी तटबंध को तोड़कर बाहर आने की आशंका थी। परंतु ग्रामीणों ने तट बंध पर मिट्टी डाली और तटबंध को बचा लिया गया। उधर मालन में पानी कम होने पर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
ग्रामीण जयवीर सिंह,राजेंद्र सिंह, राकेश चौधरी आदि का कहना है कि यदि अब दोबारा से बारिश होती है, और पानी बढ़ता है तो तटबंध टूटने का खतरा है। ग्रामीण अनुदीप चौधरी, जयपाल सिंह, सुरेंद्र सिंह आदि ने प्रशासन से मांग की है कि इस तक तटबंध को जल्द से जल्द ठीक करा जाए।
पशुओं के लिए चारे का इंतजाम करना हो रहा मुश्किल
ब्रह्मपुरी में मालन और गंगा का पानी भले ही कम हुआ हो परंतु गांव में अभी भी उतना ही पानी भरा हुआ है। घरों में जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। हालांकि बच्चे और बूढ़े बहुत ज्यादा परेशान हो गए हैं। लोगों को खाने के लिए सब्जी और रोटी का इंतजाम करना बहुत मुश्किल हो रहा है। किसान सुरेंद्र सिंह, हीरा सिंह का कहना है कि पशु भूख से मरे जा रहे हैं। उनको चारे की व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है।
बाढ़ के पानी में आनंद ले रहे बच्चे
अभी भी बिजनौर से रावली रोड पर बड़कला के पास दो से तीन फीट पानी सड़क पर चल रहा है। जिसमें बच्चे आनंद ले रहे हैं। पेड़ों पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं। उधर मुजफ्फरपुर केशो गांव में भी पानी भरा हुआ है जो लोगों की परेशानी का सबब बना हुआ है।
तटबंध बचाने के लिए रातभर डाला डेरा
बाकरपुर गढ़ी में मालन नदी पर बने तटबंध की सुरक्षा के मद्देनजर शुक्रवार की रात प्रशासन को बहुत मशक्कत करनी पड़ी। एडीएम प्रशासन, एसडीएम सदर, अन्य कर्मी और बाढ़ नियंत्रण के नोडल अधीक्षण अभियंता मध्यरात्रि तक बाकरपुर गढ़ी में डेरा डाले हुए थे। उधर शुक्रवार की देर शाम एसपी नीरज कुमार जादौन ने भी गांव का दौरा किया और ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि यदि कोई समस्या आती है तो बेझिझक संपर्क करें।