नींदडू। सोमवार से रमजान का दूसरा अशरा शुरू हो गया। यह अशरा इंसानों के गुनाहों से मगफिरत (मुक्ति) का है। मौलवी शमशीर अहमद ने बताया कि नबी-ए-पाक ने लोगो को हिदायत देते हुए कहा कि रमजान का दरमियानी अशरा मगफिरत का है। इन 10 दिनों में ज्यादा से ज्यादा दुआ, जिक्र, कुरआन की तिलावत, तसबीहात और इबादत का अहतमाम करने के अलावा कसरत से असतगफार कर अपने रब से गुनाह माफ कराने चाहिए।
मोहम्मद फैसल ने बताया कि हदीस शरीफ में दूसरे अशरे को बखशीश का अशरा कहा गया है। अल्लाह तआला इसमें बेशुमार बंदों की मगफिरत फरमाते हैं। हम सबको चाहिए कि इस अशरे में अपने गुनाहों से तौबा करें और हर मुमकिन तरीके से अपने रब को राजी करने की कोशिश करें। रमाजान अल्लाह की तरफ से इनाम है, इस सुनहरे मौके से फायदा उठाना चाहिए।
मौलवी गयासुद्दीन ने बताया कि रमजान के तीन हिस्से इस लिए हैं कि आदमी भी तीन तरह के हैं। एक वह जिन पर गुनाहों का बोझ नहीं। उन पर शुरू से ही इनाम होता है। दूसरे वह जो मामूली गुनहगार हैं, कुछ रोजे रखने के बाद उनकी मगफिरत हो जाती है। तीसरे वह जो शुरू से ही बख्शे बखशाए हैं। इस अशरे में रोजे का मुआवजा मिलना और मगफिरत शुरू हो जाती है। मौलवी अबरार अहमद ने बताया कि रमजान का महीना बड़ी बरकत और बड़ी अजमत का है। इसमें सुबह व शाम अस्तगफार करना चाहिए तथा अपने गुनाहों पर शर्मिंदा होकर माफी मांगना चाहिए। माफी मांगने से हमारा रब खुश होता है और हमारी मगफिरत कर देता है।