फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदले वातावरण में खुद को नहीं ढाल पाई विदेशी गाय

Wed, 25 Apr 2018 11:59 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर
विज्ञापन
बिजनौर के गजरौला शिव में डेरी में खड़ी एचएफ नस्ल की गाय। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
ठंडे देशों की विदेशी गाय एचएफ (होल्सटीन फ्रिसियन ) पश्चिमी उत्तर प्रदेश के माहौल में ढल नहीं पाई है। पतला दूध यानी उसमें सोलिड नेट फैट कम होने, बढ़ता बांझपन और जल्दी बीमारियों के चपेट में आने की समस्या के चलते लोगों का गाय की इस प्रजाति से मोह भंग हो रहा है। प्रतिदिन 30 लीटर दूध देने की क्षमता के कारण किसानों और डेयरी संचालकों ने इन्हें खरीदा लेकिन अब यह उनके लिए घाटे का सौदा बन गई, वे अब देशी नस्ल गाय या भैंस पालन की ओर रुख कर रहे हैं। जिले में एचएफ गाय की दस्तक करीब दस साल पहले हुई थी, उस समय डेयरी संचालकों ने एचएफ की खूब खरीदारी की। इसकी दूध देने की क्षमता देशी गाय से दोगुनी से भी ज्यादा है। लेकिन यहां इस गाय के दूध की धार बहुत पतली हो गई है। एचएफ में बांझपन की समस्या भी बढ़ रही है। ऐसे में किसान या तो इस गाय को बेचकर फिर से देशी गाय की नस्लों को अपना रहे हैं। एचएफ गाय यूरोपीय देशों से आई हैं। वहां पर बहुत ठंड होती है, यूपी में वहां के मुकाबले बहुत अधिक तापमान होता है। बिजनौर में गर्मियों में 40-42 डिग्री तक तापमान पहुंच जाता है। यहां के मौसम से सामंजस्य नहीं बैठा पाई है। पशु पालन विभाग की ओर से कामधेनु योजना के अंतर्गत किसानों ने एचएफ गाय पालनी शुरू की थी। लेकिन अब इन डेरियों पर एचएफ गाय की नस्ल तेजी से कम हो रही है। एक साल में इन डेरियों पर एचएफ गाय की संख्या 200 तक घट गई है। पिछले साल कामधेनु योजना में 100 पशुओं वाली सात डेरी में 323 एचएफ गाय थीं। इस साल इनकी संख्या 245 रह गई। माइक्रो कामधेनु योजना में गाय 617 से 550 व मिनी कामधेनु में 395 से 340 रह गई हैं। दूध के दाम भी मिलते कम डेयरियों पर दूध की कीमत का निर्धारण एसएनएफ (सोलिड नेट फैट) और फैट से होता है। एचएफ गाय का दूध देशी गाय के मुकाबले बहुत पतला होता है। डेरी पर दूध का भुगतान दूध के फैट से होता है। देशी गाय के दूध में फैट 50, भैंस में 80 से अधिक होता है। लेकिन एचएफ के दूध में फैट 25 से 30 प्रतिशत तक ही होता है। आधी रह गई एचएफ की कीमत एक समय एचएफ गाय की जिले में बहुत डिमांड थी। एचएफ गाय की कीमत तीन साल पहले 90 हजार रुपये तक थी। लेकिन अब इसकी कीमत घटकर 45 से 50 हजार रुपये ही रह गई है। - एचएफ गाय का दूध बहुत पतला है। इसमे बीमारी भी बहुत आ रही हैं। किसानों को क्रॉस ब्रीड वाली गाय या देशी नस्ल की गायों को पालने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।एसआर राणा, जीएम, पराग डेरी मुरादाबाद -माहौल तो इस नस्ल के लिए बहुत अधिक प्रतिकूल नहीं है, लेकिन प्रबंधन व्यवस्था बहुत अच्छी होनी चाहिए। इस नस्ल की गाय को पूरे साल हरा चारा जरूरी है। दूध पतला और कम होने की वजह संतुलित आहार का अभाव हो सकता है। चिकित्सीय परीक्षण कराकर उपचार किया जा सकता है। डाक्टर राजबीर सिंह, डीन वेटनरी सरदार वल्लभ भाई कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि, मोदीपुरम -एचएफ में बीमारी बढ़ रही हैं। बांझपन के अलावा इन गायों का तापमान गर्मी में बहुत बढ़ जाता है। बहुत दवाई खिलानी पड़ती है। एक समय उनके पास 25 से अधिक एचएफ गाय थीं, लेकिन केवल दो एचएफ गाय हैं। मुकुल, डेयरी संचालक, निवासी गांव गजरौलाशिव - किसान गायों के बांझपन का उपचार करा सकते हैं। काफी हद तक यह ठीक हो जाता है। किसान विदेशी नस्ल की गायों का देशी नस्ल की नस्ल के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान कराएं। एचएफ की बीमारी नई पैदा होने वाली नस्ल में बहुत कम रहेंगी। इसके अलावा किसान गाय के खान पान का ध्यान रखें तो भी बांझपन की समस्या कम होगी। भूपेंद्र सिंह, मुख्य पशुधन चिकित्साधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें