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...माटी की देह में परमेश्वर ढूंढता हूं : बाबा फुलसंदे वाले

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बिजनौर। सागर जैसी जिंदगी में मोती को ढूंढता हूं, माटी की देह में परमेश्वर तुझको ढूंढता हूं। इन लाइनों के संग सतपुरुष बाबा फुलसंदे वालों ने सत्संग में प्रवचनों की शुरुआत की। सत्संग में ईश्वर की भक्ति का संदेश दिया।
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काकरान वाटिका में चल रहे सत्संग का शनिवार को दूसरा दिन रहा। जिसमें सतपुरुष बाबा फुलसंदे वालों के प्रवचन सुनने के लिए अनुयायियों की भीड़ उमड़ी रही। बाबा फुलसंदे वालों ने प्रवचन करते हुए कहा कि जीवन को उच्चता में ले जाने के लिए किसी महान मार्गदर्शक की जरूरत होती है। ये मार्गदर्शक सतगुरु होते हैं, गुरु के बिना भक्ति नहीं हो सकती। गुरु के बिना जीवन अधूरा ही नहीं बल्कि इंसान के रुप में जन्म लेने का मकसद भी पूरा नहीं होता। राष्ट्रवाद, मानवतावाद और ईश्वरवाद में सबको विश्वास रखना चाहिए।
सत्संग में नारायणी साहित्य अकादमी संस्था दिल्ली की अध्यक्ष पुष्पा सिंह को जन्मदिन पर श्रेष्ठ काव्य के सृजन के लिए ब्रह्म प्रिय नारायणी सम्मान दिया गया। सत्संग के बाद बाबा फुलसंदे वाले अपने अनुयायियों के संग कुष्ठ आश्रम पहुंचे, जहां रहने वालों के लोगों का हाल चाल जाना। कुष्ठ आश्रम में जरूरत का सामान भेंट किया। बाबा ने संदेश दिया कि लाचार, मजबूर की सेवा अवश्य करनी चाहिए। सत्संग में पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह, सोहंग देवता धनपति राहुल, गगनपाल, सत्यवीर सिंह, अजय वीर सिंह, देशराज सिंह, नरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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