- 27 फरवरी से सात मार्च तक चलेंगे होलाष्टक
- पांच राशियों पर पड़ेगा होलाष्टक का दुष्प्रभाव
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। होली से आठ दिन पहले होलाष्टक शुरू हो गए हैं। होलाष्टक में कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। होलाष्टक 27 फरवरी से शुरू होकर सात मार्च तक चलेंगे। होलाष्टक फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से प्रारंभ होकर फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि तक रहते हैं।
शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक दो शब्दों होली और अष्टक शब्द से मिलकर बना है। होलाष्टक में पूजा पाठ करना शुभ माना जाता है। होलाष्टक में शादी, मुंडन, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इसके अलावा घर, वाहन, भूमि पूजन, नया व्यापार आदि शुरू न करें। होलाष्टक में हर दिन अलग-अलग ग्रह उग्र रूप में होते हैं। इसमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
विद्वानों के अनुसार इस साल होलाष्टक का दुष्प्रभाव पांच राशियों पर रहेगा। मिथुन राशि के जातकों को बेवजह तनाव रह सकता है। लोगों के साथ वाद-विवाद करने से बचें। कर्क राशि वाले जातकों को घरेलू समस्याओं से बच कर रहना चाहिए। भूमि भवन से जुड़े विवाद आपकी परेशानी का कारण बन सकते हैं। वृश्चिक राशि वालों की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है, बेवजह की चीजों पर धन खर्च न करें, नए कार्य की शुरुआत के लिए समय अनुकूल नहीं है। मकर राशि के जातकों पर होलाष्टक की अवधि में सावधान रहना चाहिए, रिश्तों में तनाव आने की संभावना है। सेहत का विशेष ध्यान रखें। कुंभ राशि के जातकों को आलस्य और अभिमान से बचना होगा। होलाष्टक में रोगों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की पूजा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके अलावा श्री सूक्त, विष्णु सहस्त्रनाम, हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।
होलाष्टक में नहीं होते शुभ कार्य : डॉ. अरविंद शर्मा
प्राच्य विद्या एवं ज्योतिष शोध संस्थान के ज्योतिषविद् डॉ. अरविंद शर्मा ने बताया कि होलाष्टक में कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। होलाष्टक का किसी पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है।
होलाष्टक में पूजा पाठ करना शुभ : पंडित ललित शर्मा
सिविल लाइन स्थित धार्मिक संस्थान विष्णु लोक के ज्योतिषविद् पंडित ललित शर्मा का कहना है कि होलाष्टक में कोई भी शुभ एवं मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। हालांकि होलाष्टक में पूजा पाठ करना शुभ होता है। इसलिए घरों में पूजा पाठ जरूर करें।