मनरेगा मजदूरी के भुगतान में हल्दौर ब्लॉक अव्वल
बिजनौर। मनरेगा मजदूरी के भुगतान में हल्दौर ब्लॉक अव्वल है, जबकि नजीबाबाद फिसड्डी साबित हो रहा है। दरअसल, मजदूरों को गांव में ही घर बैठे मजदूरी भुगतान की व्यवस्था शुरू हो गई है। स्वयं सहायता समूहों की बीसी सखी को यह जिम्मेदारी दी गई है। मनरेगा मजदूरों को चार महीने में करीब 70 लाख मजदूरी भुगतान गांव में हुआ है।
सीडीओ पूर्ण बोरा की मंशा है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आए और शोषण पर लगाम लग सके। एनआरएलएम के उपायुक्त ज्ञान सिंह ने बताया कि मनरेगा मजदूरों की कार्य ऑनलाइन हाजिरी की व्यवस्था हुई। अब मनरेगा मजदूरों को मजदूरी का भुगतान गांव में घर बैठे होना शुरू हो गया है। 278 पंचायतों में व्यवस्था शुरू है। अन्य में लागू की जा रही है। भुगतान की जिम्मेदारी समूह की बिजनेस कोरसपोंडेंट सखी अर्थात बीसी सखी को सौंपी है। बीसी सखी को भुगतान मशीन आवंटित है। बीसी सखी श्रमिक के घर जाकर भुगतान करेंगी। जिले की 278 पंचायतों में 540 बीसी सखी नियुक्त हैं। बीसी सखी विभिन्न योजनाओं में मजदूरों को एक अप्रैल के बाद तीन करोड़ से अधिक की मजदूरी का भुगतान कर चुकी हैं। इनमें मनरेगा मजदूरों को 69 लाख का भुगतान हुआ।
सबसे अधिक भुगतान हल्दौर ब्लॉक में हुआ
बताया गया कि बीसी सखी ने 11 ब्लॉकों की 287 ग्राम पंचायत में 1075 मनरेगा मजदूरों को 69,19,523 रुपये मजदूरी का भुगतान किया है। सबसे अधिक हल्दौर ब्लॉक की 43 ग्राम पंचायतों में 10,31,981 रुपये का भुगतान 145 श्रमिकों को हुआ है। सबसे कम भुगतान नजीबाबाद ब्लॉक में हुआ है। वहां 18 पंचायतों में 49 श्रमिकों को 3,04,196 रुपये का भुगतान हुआ है।