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गुलदार का दांव : गर्दन बची तो ठीक, नहीं तो मौत पक्की

Wed, 02 Aug 2023 12:38 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
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मेरठ-पौड़ी हाइवे पर किरतपुर के पास बैठा गुलदार। स्त्रोत सोशल मीडिया।
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रजनीश त्यागी
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बिजनौर। जिले में पिछले सात में 12 लोगों की जान गुलदार ले चुके हैं। अलग-अलग जगहों पर यह हमले हुए, जिससे यह तो तय माना जा रहा है कि कई गुलदार हमलावर हो चुके हैं। इन सभी में एक तथ्य एक जैसा ही मिला, वो था सभी पर पहला वार गर्दन पर हुआ। सभी इंसानों को गुलदार ने गर्दन से दबोचा। सांस की नली को ब्लॉक होने और गले की नसें क्षतिग्रस्त होने से एक ही झटके में सांस रुक गई। ऐसे में वन्य जीव विशेषज्ञों की मानना है यदि किसी तरह गर्दन बच जाए तो गुलदार के हमले में जान जाने का जोखिम भी 50 प्रतिशत तक कम हो जाएगा।
यूं तो जिले में बाघ और गुलदार के नरभक्षी बनने का इतिहास काफी पुराना हो चला है। एक या दो जान तो पहले भी जाती रही हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मौत का सिलसिला 2012-13 से शुरू हुआ था। अमानगढ़ के आसपास एक बाघिन ने दस से ज्यादा लोगों की जान ली थी। इसके बाद मंडावर-चंदक क्षेत्र में वर्ष 2019-20 में एक गुलदार नरभक्षी हुआ तो उसने पांच से ज्यादा लोगों की जान ले ली।
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अब इसी साल केवल सात माह में रेहड़ और नगीना क्षेत्र में अगल-अलग गुलदार 12 इंसानों को मार चुके हैं। 20 से ज्यादा लोग अब तक घायल हो चुके हैं, जो किसी तरह उसके हमले में बच गए। इन सब घटनाओं में एक तथ्य केवल एक जैसा है, वो है पहला हमला इंसानों की गर्दन पर होना।
जी हां अब तक नरभक्षी गुलदार और बाघ का शिकार हुए लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण शॉक एंड हेमरेज आया और उनकी जान गर्दन की नसें और सांस नली बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने से गई। यह बात अलग है कि मरने के बाद कई इंसानों का इन जानवरों ने मांस भी खाया।
मजबूत जबड़े और लंबे दांत भेद देते हैं सांस नली
विशेषज्ञों के मुताबिक गुलदार के जबड़े बहुत मजबूत होते हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह जानवर अपने से ढ़ाई गुना वजन को जबड़े में दबाकर पेड़ पर चढ़ जाता है। यह अपने शिकार को पेड़ पर बैठकर भी खाता है। ऐसे में जब यह किसी की गर्दन पकड़ता है तो उसके नुकीले और लंबे दांत नसों को क्षतिग्रस्त करते हुए सांस नली को भेद देते हैं। इससे इंसान की मौत या तो उसी समय हो जाती है, नहीं तो वह पैरालाइज हो जाता है। जिससे वह अपना बचाव नहीं कर पाता, फिर उसे खींचकर ले जाना गुलदार के लिए आसान हो जाता है।

गर्दन में गमछा या नेकबेंड बचा सकता है जान
वन विभाग के एसडीओ ज्ञान सिंह कहते हैं कि हमने गुलदार प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों को जंगल जाते समय गले में गमछा या नेकबेंड लगाकर जाने को कहा है। साथ ही अपनी टीम को भी नेकबेंड और हेलमेट उपलब्ध कराए हैं। ताकि गुलदार के गर्दन पर हमले से बचाया जा सके। यह बात सही है कि गुलदार पहला हमला गर्दन पर ही करता है।

पेड़ पर चढ़ने और छिपने में शातिर, नाम है छलिया
वन्य जीव विशेषज्ञ और जिम कार्बेट रिसर्च स्कॉलर जोएल लायेल कहते हैं कि आमतौर पर बाघ सामने से हमला कर देता है, लेकिन गुलदार के मामले में दूसरा पक्ष बहुत खतरनाक है। गुलदार पेड़ पर चढ़ने में माहिर होता है और यह छिपने के लिए किसी पेड़ पर चढ़कर बैठ सकता है। इसके अलावा यह घास और खेत में इतना शातिरता से छिपकर बैठ सकता है कि पड़ोस से निकलने वालों को इसकी भनक तक न लगे। इसलिए इसे छलिया भी कहा जाता है। गुलदार प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को अकेले जंगल नहीं जाना चाहिए और खेत में काम करने से पहले हांका करना चाहिए।

ग्राम प्रधानों से जानवरों के शव दफनाने के लिए पत्र लिखा
एसडीओ ज्ञान सिंह ने बताया कि देखने में आया है कि जंगल क्षेत्रों में बाढ़ का पानी है। ऐसे में गुलदार के आबादी की ओर आए हैं। वहीं देहात क्षेत्रों में जगह-जगह गोवंश के शव पड़े हैं। उनके पीछे भी गुलदार आबादी तक पहुंच रहे हैं। सभी ग्राम प्रधानों को पत्र लिखकर ऐसे शवों को दफनाने, मरने वाले मवेशियों को भी दफनाने के लिए कहा गया है। ताकि गुलदार आबादी की ओर न पहुंचे।
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एक और गुलदार की तस्वीर ट्रैप कैमरे में कैद
रेहड़ क्षेत्र में वन विभाग ने जो ट्रैप कैमरे लगाए थे, सोमवार रात फिर से उसमें एक गुलदार की तस्वीर कैद हो गई। इससे पहले ही इसी क्षेत्र में एक गुलदार की तस्वीर ट्रैप कैमरे में आई थी। मचान बनाकर इन क्षेत्रों में गुलदार के आने का इंतजार किया जा रहा है। इन दिनों सोशल मीडिया पर भी कई वीडियो चल रही है। यह सभी वीडियो में गुलदार कहीं सड़क पर दिखाई दे रहा है तो कहीं बाइक सवारों पर झपटता नजर आ रहा है। हालांकि वन विभाग इनमें से कई वीडियो पुरानी या फिर दूसरी जगहों की होने का दावा कर रहा है। ऐसी ही एक वीडियो मंगलवार को सोशल मीडिया पर चली, जिसे नजीबाबाद रोड पर स्वाहेड़ी फ्लाईओवर के पास की बताई जा रही है।


वन्य जीवों के हमले से बचने के बताए सात सूत्र

1 - भूल कर भी खुले में न जाएं शौच,
- शौचालय बनवाएं और उसका इस्तेमान करें


2- निरंतर निगरानी, टिकाऊ समाधान
- युवाओं के निगरानी समूह का गठन कर देर शाम तक करें गश्त


3 - नशे में हैं तो घर के अंदर रहें
इस हाल में हिंसक जीव आपकाे बहुत आसानी से शिकार बना सकता है।


4 - दूरी बनाकर जिंदगी बचाएं
बाघ, तेंदुए, हाथी के पास न जाएं, न ही उनके द्वारा किए गए शिकार के पास


5 - बच्चे आपके धरोहर हैं, उन्हें सुरक्षित रखें
बच्चों को कभी भी, कहीं भी न छोड़ें अकेला, चाहे वह आपके घर का आंगन ही क्यों न हो


6 - गन्ने के खेत होते हैं हिंसक जीवों के आश्रय
समूह में करें गन्ने की कटाई और शोर-गुल एवं गाने बजाते हुए करें खेतों में प्रवेश


7 - हिंसक जानवरों के छुपकर हमले का रखें ध्यान
घर के आसपास सफाई एवं रात में रोशनी का प्रबंध करें। बगैर टॉर्च रात को बाहर न जाएं।
कब-कब गई गुलदार के हमने में जान
-17 फरवरी 23 को नगीना के गांव किरतपुर में किशोरी अदिति को मारा
-4 मार्च 23 नहटौर के गांव बल्लाशेरपुर में मासूम पूर्वी को मारा
-18 मार्च 23 नगीना के गांव काजीवाला में मिथिलेश को मारा
-19 अप्रैल 23 को अफजलगढ़ के गांव सीरवासचंद में तुंगल सैनी को मारा
-23 अप्रैल 23 की रात रेहड़ के गांव उदयपुर चांदपुर में मासूम अर्शी को घर से उठाकर मार डाला
-25 अप्रैल रेहड़ के गांव मूसापुर में खुशी छह वर्ष को ले गया और मार डाला
-26 अप्रैल सुबह घूमने निकले युवक राहुल को मारा
-21 जून को अफजलगढ़ के गांव मोहम्मदपुर राजौरी निवासी कमलेश देवी को उत्तराखंड की सीमा में मारा
-22 जून रेहड़ के गांव मच्छमार में गुलदार ने हमला कर दस वर्षीय बच्चे को मारा
-17 जुलाई को कोतवाली देहात गांव मखवाड़ा में महिला गुड्डी को मारा
-27 जुलाई को गांव तेलीपुरा में युवक 18 वर्षीय संदीप को मार डाला
-30 जुलाई को रेहड़ थाना क्षेत्र के ग्राम भटपुरा में बनैली नदी के पास जमना देवी 19 वर्ष को मार डाला
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