बिजनौर। भले ही आदमखोर गुलदार को पकड़ने के लिए तमाम जतन किए जा रहे हैं लेकिन कहीं न कहीं ढिलाई भी देखने को मिल रही है। दिनभर पिंजरे खाली रहते हैं, ऐसे में गुलदार कैसे इन पिंजरों में आकर फंस सकेगा। हालांकि रात में बकरी बांधी जाती है जबकि गुलदार ने अब तक सभी लोगों को दिन में ही मारा है। ऐसे में गुलदार भूख मिटाने का रात का इंतजार ही क्यों करेगा।
नगीना क्षेत्र के गांव तेलीपुरा से लेकर कोतवाली देहात के गांव सिकंदरपुर तक वन विभाग ने गुलदार को काबू में करने के लिए पिंजरा लगाए हैं। उधर अफजलगढ़ क्षेत्र में भी आदमखोर को पकड़ने के लिए पिंजरे लगे हैं। इसके साथ ही भारी भरकम अमला भी जुटा हुआ है। लेकिन ये पिंजरे दिनभर खाली रहते हैं।
पिछले दिनों तेलीपुरा के लोगों ने यह मुद्दा भी उठाया था कि पिंजरों में दिन में बकरी नहीं बांधी जा रही है। लोगों का का तर्क था कि सिर्फ रात में ही गुलदार बकरी खाने के लिए पिंजरे तक नहीं आएगा। क्योंकि अब तक जिन लोगों को गुलदार ने मारा है, वे सभी घटनाएं दिन की है। ऐसे में दिन में खाली पिंजरों में कैसे गुलदार फंसेगा।
- कैट फैमिली फूड से गुलदार को रिझाने की तैयारी
एसडीओ ज्ञान सिंह ने बताया कि अब पिंजरों में कैट फैमिली फूड भी लगाया जाएगा। यानि अंडा, मछली और मुर्गे के मांस का मिश्रण तैयार कर पिंजरों में लगाया जाएगा। यह फूड कैट फैमिली का माना जाता है। एक पिंजरे में यह फूड लगाया भी गया है।
- थर्मल ड्रोन से किया गया सर्वे
टीम ने शनिवार को तेलीपुरा और आसपास के जंगल में ड्रोन से सर्वे किया। इसमें एक थर्मल ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया जोकि वन्य जीवों के तापमान को लेकर भी तस्वीर साफ कर देता है। ड्रोन सर्वे में ही तेलीपुरा के जंगल के आस पास गुलदार के पदचिह्न मिले हैं।
वर्जन:
तेलीपुरा के जंगल में गुलदार के पदचिह्न मिले हैं। ड्रोन से सर्वे कराया गया है। दिन में गर्मी के चलते बकरी मर सकती है, ऐसे में शाम को चार बजे के बाद पिंजरों में बकरी बांध दी जाती है। हालांकि अब एक पिंजरे में कैट फैमिली का फूड भी रखा गया है। - ज्ञान सिंह, एसडीओ वन विभाग
बिजनौर के गांव तेलीपुरा के पास गुलदार को पकड़ने के लिए लगाया गया पिंजरा। स्रोत पुलिस।