मुन्नी फिरोजा की इकलौती पुत्री थी। रात्रि करीब तीन बजे आंख खुलने पर फिरोजा को मुन्नी चारपाई पर नहीं मिली। तलाशने पर घर के पास गुलदार के पदचिह्न मिले। शोर सुनकर वहां पहुंचे ग्रामीणों ने सुबह तक बच्ची को तलाशा पर पता नहीं लगा।
वन विभाग बढ़ापुर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी कपिल कुमार व एसडीओ वनकर्मियों की टीम व ग्रामीणों के साथ कांबिंग कर घर के पास खड़ी ईंख के खेतों में बच्ची को तलाश रहे हैं।
सता रहा डर, आमदखोर न बन जाए गुलदार
बच्ची को उठाने के बाद वन विभाग की टीम को डर सता रहा है कि गुलदार कहीं आमदखोर न बन जाए, क्योंकि वन्य जीव विशेषज्ञों की मानें तो गुलदार यदि इंसानी खून का स्वाद चख लेता है तो फिर उसका आदी हो जाता है। ऐसे में गुलदार द्वारा इंसानों पर हमले बढ़ने की आशंका रहती है। फिलहाल वन विभाग ने गुलदार की तलाश तेज कर दी है।