Bijnor : खेतों में गुलदारों की आमद रोकने के लिए ग्रामीणों ने यह तरीका खोजा है, जिसे वन विशेषज्ञ भी कुछ हद तक कारगर बता रहे हैं। चंदक, छाछरीमोड़ आदि क्षेत्रों में जंगल जाने वाले कुछ ग्रामीण मोबाइल में फिल्म चलाकर खेतों पर घूम रहे हैं ताकि गुलदार को एक से अधिक लोगों के साथ होने का भ्रम हो और वह पास न आए।
जिले के जंगलों में सनी देओल की दहाड़ से गुलदार घबरा रहे हैं। खेतों में गुलदारों की आमद रोकने के लिए ग्रामीणों ने यह तरीका खोजा है, जिसे वन विशेषज्ञ भी कुछ हद तक कारगर बता रहे हैं। चंदक, छाछरीमोड़ आदि क्षेत्रों में जंगल जाने वाले कुछ ग्रामीण मोबाइल में फिल्म चलाकर खेतों पर घूम रहे हैं ताकि गुलदार को एक से अधिक लोगों के साथ होने का भ्रम हो और वह पास न आए। खासतौर से ग्रामीणों को तेज आवाज वाली सनी देओल की फिल्में इसके लिए कारगर नजर आ रही हैं।
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जिले के आबादी क्षेत्र और खेतों में गुलदार की मौजूदगी लगातार सामने आ रही है। बढ़ापुर, नगीना, चांदपुर और बिजनौर तहसील में लगातार खेतों में गुलदार देखे जा रहे हैं। अनुमान है कि जिलेभर के जंगलों में 150 से ज्यादा गुलदार घूम रहे हैं। इनकी संख्या भी लगातार बढ़ रही है। हाल ही की बात करें तो शुक्रवार को छाछरीमोड़ क्षेत्र में एक गुलदार मृत मिला है, जिससे इस क्षेत्र में गुलदार की मौजूदगी की पुष्टि हो रही है।
वहीं एक सप्ताह पहले रावली क्षेत्र में किसान पर गुलदार ने हमला किया था। ऐसे में वन विभाग ने ड्रोन की मदद से खेतों की मैपिंग भी शुरू कर दी है। वहीं ग्रामीणों ने गुलदार के हमले से बचने के लिए मोबाइल की मदद लेनी शुरू कर दी है। खासतौर से शाम के समय ग्रामीण अपने खेतों पर मोबाइल की फ्लैश टार्च ऑन कर तेज आवाज डॉयलॉग वाली फिल्म चला रहे हैं। ताकि गुलदार को एक से अधिक लोगों के एक साथ होने का भ्रम हो। माना जा रहा है कि गुलदार भीड़ पर हमला नहीं करता। वहीं वन अधिकारी खुद ग्रामीणों को ऐसे क्षेत्रों में समूह में खेतों पर जाने की सलाह दे रहे हैं।
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रात में ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं : जोएल लायल
वन्य जीव विशेषज्ञ जोएल लायल कहते हैं कि रात के समय सबसे ज्यादा खतरनाक यदि कोई वन्य जीव हो जाता है तो वह गुलदार ही है। यह कहीं से भी हमला करता सकता है और यह पेड़ पर भी चढ़ने में माहिर होता है। जहां गुलदार होने की संभावना है, वहां ग्रामीणों को समूह में ही जाना चाहिए। यदि अकेले हैं तो रात में मोबाइल की टार्च जलाकर, तेज आवाज के डायलॉग फिल्म चलाना गुलदार के हमले से बचाने में सहायक हो सकते हैं।
ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह: डीएफओ
डीएफओ डॉ.अनिल पटेल कहते हैं कि जनपद के ग्रामीण इलाकों से गुलदार देखे जाने की शिकायतें मिल रही हैं। उन्हें सतर्क रहने, समूह में खेत पर जाने, खेतों पर जाकर हाका करने, मोबाइल, रेडियो से लगातार तेज ध्वनि करने की सलाह दी जा रही है। मोबाइल से तेज डायलॉग फिल्म चलाना भी कारगर साबित हो सकता है।