-इस साल फरवरी से अब तक 18 लोगों की जान गुलदार के हमलों में गई
-अब तक 38 लाख रुपये से ज्यादा ऑपरेशन गुलदार पर हो चुके खर्च
-गुलदारों की संख्या के सामने नहीं काम आ रही वन विभाग की रणनीति
-इस साल 41 छोटे-बड़े गुलदार वन विभाग पकड़ चुका है, छह की हुई मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जिले में गुलदार दशहत का पर्याय बन चुका है। जिले में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहां गुलदार की मौजूदगी न हो। इस साल तो मानों एक या दो नहीं, कई गुलदार नरभक्षी हो गए हैं। इस साल की बात करें तो कुल 41 छोटे-बड़े गुलदार पकड़े जा चुके हैं। इसके बावजूद एक के बाद एक 18 इंसानों की जान गुलदार के हमलों की चली गई। वन विभाग की रणनीति भी गुलदार के हमले रोकने में काम नहीं आ रही है।
जिले में गुलदार गन्ने के खेतों को अपना ठिकाना बना चुके हैं। रिजर्व फॉरेस्ट में रहने वाला यह वन्य जीव आराम से आबादी के पास गन्ने के खेतों में रह रहा है और अपना कुनबा बढ़ा रहा है। खुद वन विभाग के अफसर भी मानते हैं कि गन्ने के खेतों में जिलेभर में 400 से ज्यादा गुलदार हो सकते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो यह डरावने हैं। इस साल सबसे पहले 17 फरवरी को नगीना के गांव किरतपुर में किशोरी अदिति को गुलदार ने मारा था। इसके बाद यह सिलसिला चलता रहा और बृहस्पतिवार को हीमपुरदीपा क्षेत्र के गांव रेहरा में एक किशोर को मार दिया। अब गुलदार के हमलों में मरने वालों की संख्या 18 हो गई है।
ऑपरेशन गुलदार पर खर्च हुए 38 लाख रुपये से ज्यादा
पिछले दिनों नगीना और अफजलगढ़ क्षेत्र में 25 से ज्यादा जिलों की टीम ने डेरा डाल लिया था। चार हाथी भी गुलदार तलाशने के लिए बुलाए गए। कई गुलदार पकड़े भी गए, लेकिन हर बार नया गुलदार हमला कर लोगों की जान ले लेता है। इसमें वन विभाग ने 38 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए। इसके बावजूद वन विभाग के पास इसका कोई ठोस जबाव नहीं है कि किस तरह गुलदार के हमलों को रोका जा सकता है।
सुबह और शाम के समय हो रहे हमले
वन विभाग के अफसरों का कहना है कि गुलदार प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहना होगा। खासतौर से गुलदार सुबह और शाम के समय सबसे ज्यादा हमले कर रहा है। अब हुए हमलों का आकलन कर वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
रेहरा में लगवाए पिंजरे, पगचिह्न भी मिले: एसडीओ
एसडीओ ज्ञान सिंह ने बताया कि गांव रेहरा में टीम को भेजा गया है। गुलदार की तलाश की जा रही है। पिंजरे लगवा दिए गए हैं। साथ ही घटना स्थल के आसपास पगचिह्न भी मिले हैं। टीम पगचिह्न से उसका आकलन कर रही है। गुलदार को शीघ्र पकड़ लिया जाएगा। ग्रामीणों को सतर्कता बरतने के लिए भी कहा गया है।
कब-कब गई गुलदार के हमने में जान-17 फरवरी 23 को नगीना के गांव किरतपुर में किशोरी अदिति को मारा
-4 मार्च 23 नहटौर के गांव बल्लाशेरपुर में मासूम पूर्वी को मारा
-18 मार्च 23 नगीना के गांव काजीवाला में मिथिलेश को मारा
-19 अप्रैल 23 को अफजलगढ़ के गांव सीरवासचंद में तुंगल सैनी को मारा
-23 अप्रैल 23 की रात रेहड़ के गांव उदयपुर चांदपुर में मासूम अर्शी को घर से उठाकर मार डाला
-25 अप्रैल रेहड़ के गांव मूसापुर में खुशी छह वर्ष को ले गया और मार डाला
-26 अप्रैल सुबह घूमने निकले युवक राहुल को मारा
-21 जून को अफजलगढ़ के गांव मोहम्मदपुर राजौरी निवासी कमलेश देवी को उत्तराखंड की सीमा में मारा
-22 जून रेहड़ के गांव मच्छमार में गुलदार ने हमला कर दस वर्षीय बच्चे को मारा
-17 जुलाई को कोतवाली देहात गांव मखवाड़ा में महिला गुड्डी को मारा
-27 जुलाई को गांव तेलीपुरा में युवक 18 वर्षीय संदीप को मार डाला
-30 जुलाई को रेहड़ थाना क्षेत्र के ग्राम भटपुरा में बनैली नदी के पास जमना देवी 19 वर्ष को मार डाला
-02 अगस्त को सिंकदरपुर में जंगल गए एक व्यक्ति को मार डाला, उसका मांस भी खा गया
-27 अगस्त को अफजलगढ़ क्षेत्र के गांव शाहपुर जमाल में गुलदार ने एक महिला (70) की जान ले ली
-28 अगस्त को साहूवाला रेंज के गांव भोगपुर में लघुशंका करने गए 13 वर्षीय किशोर को मार दिया
-28 सितंबर को अफजलगढ़ के गांव माननगर शाहपुरजमाल में गुलदार ने बच्चे को मार डाला
-02 नवंबर को ग्राम हसनअलीपुर धर्मा उर्फ खत्रीवाला में 12 वर्षीय बालक जिगर को मार डाला
-29 नवंबर को हीमपुर दीपा के ग्राम रेहरा में गुलदार ने 14 वर्षीय अलफेज को मार डाला