राजकीय इंटर कॉलेजों के भवन जर्जर, वैकल्पिक भवनों में नहीं सुविधाएं
बिजनौर। जिले के कई राजकीय इंटर कॉलेज वैकल्पिक भवन में चल रहे हैं। वैकल्पिक भवनों में पढ़ाई लिखाई की मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। विद्यार्थी बिना ब्लैक बोर्ड के पढ़ रहे हैं। यहां पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। कॉलेजों के भवन निष्प्रयोज्य घोषित हुए करीब दो साल हो गए हैं। जिला अभिभावक संघ ने राजकीय इंटर कॉलेजों के नए भवनों का निर्माण जल्द पूरा कराने की मांग की है।
जिले में 32 राजकीय हाईस्कूल व इंटर कॉलेज संचालित हैं। इनमें राजकीय इंटर कॉलेज बिजनौर, जीजीआईसी किरतपुर, सरकड़ा, नहटौर व जीआईसी अफजलगढ़ के भवन जर्जर हालत होने से दो साल पहले तकनीकी टीम ने निष्प्रयोज्य घोषित कर दिए। इसके बाद भी विद्यार्थियों की पढ़ाई जर्जर भवनों में होती रही। अभिभावकों ने विद्यार्थियों की सुरक्षा का हवाला देते हुए मामला अधिकारियों के समक्ष उठाया। शासन ने करीब एक साल पहले निष्प्रयोज्य घोषित भवनों में विद्यार्थियों का पठन पाठन नहीं करने की हिदायत दी। साथ ही तत्काल प्रभाव से निष्प्रयोज्य घोषित भवनों से विद्यार्थियों को वैकल्पिक भवन में स्थानांतरित करने को कहा। इसके बाद विद्यार्थियों को वैकल्पिक भवनों में पढ़ाया जाने लगा। वैकल्पिक भवनों में स्कूलों की पढ़ाई का समय दोपहर 12:30 से शाम चार बजे तक है।
कक्षों में बिजली की नहीं है व्यवस्था
वैकल्पिक भवनों में कमरों में बिजली नहीं है। विद्यार्थी चिलचिलाती धूप में पसीने से तरबतर रहते हैं। विद्यार्थियों को बिना ब्लैक बोर्ड के ही पढ़ाया जा रहा है। जिला मुख्यालय का 100 साल से अधिक पुराना राजकीय इंटर कॉलेज जिस वैकल्पिक भवन में चल रहा है, उसमें यूरीनल तक नहीं हैं। विद्यार्थियों के लिए पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। विद्यालय में महिला शिक्षक भी कार्यरत हैं। महिलाओं को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वैकल्पिक भवन के सामने घास हो गई थी। आरोप है कि घास से सांप तक निकल रहे थे। छात्रों की शिकायत पर दो दिन पहले घास की सफाई हुई।
अभिभावक संघ मामला अधिकारियों के समक्ष उठाएगा
जिला अभिभावक संघ के अध्यक्ष नृपेंद्र देशवाल का कहना है कि राजकीय इंटर कॉलेजों में ग्रामीण क्षेत्रों के कमजोर आर्थिक स्थिति वाले छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। शासन विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने में लगा है। जिला मुख्यालय के राजकीय इंटर कॉलेज का नया भवन तैयार है। परंतु नवनिर्मित भवन विभाग को हस्तांतरित नहीं हुआ। शासन छात्र हित में नए भवनों का निर्माण जल्द पूरा कराए। मामले को डीएम समेत विभागीय अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा। डीआईओएस रामाज्ञा कुमार के अनुसार जीजीआईसी किरतपुर के वैकल्पिक भवन में बिजली नहीं होने की जानकारी मिल गई है। जल्द समस्या का समाधान कराया जाएगा।