- अनावश्यक बच्चों पर पढ़ाई का न बनाएं दबाव
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर । पढ़ाई को लेकर बच्चे काफी तनाव लें रहे हैं। इनमें कई बच्चे असमर्थ होने के डर से वह गलत कदम उठा लेते हैं। इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चों पर पढ़ाई का अनावश्यक दबाव व बोझ न डालें। बल्कि बच्चों को मानसिक तौर पर मजबूत बनाना चाहिए।
अभिभावक, शिक्षकों कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डॉक्टर या इंजीनियर बनना ही नहीं है। बल्कि शिक्षा पाकर एक अच्छे मानव का निर्माण करना है। विद्यार्थियों को बाहर के कोचिंग संस्थान के बजाय स्कूली शिक्षा को अधिक महत्व देना चाहिए, क्योंकि स्कूल का उद्देश्य केवल किताबी शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास से है। स्कूल ही वह जगह है जहां पर बच्चे को विभिन्न चुनौतियों का सामना करना सिखाते हैं असफलताओं का सामना करना सिखाते हैं। इस पर अभिभावक व शिक्षकों की राय है।
प्रधानाचार्य अनुज त्यागी ने बताया कि कोटा में कई विद्यार्थी आत्महत्या कर चुके हैं, जो की काफी दुखद है। कहा कि बच्चों को एक ऐसी शिक्षा की बहुत जरूरत है जो उन्हें असफलता को सहन करना सिखाए तथा असफलता सफलता का ही एक सोपान है जिसको पार करके सफलता तक पहुंच जाता है। माता-पिता वह गुरुजनों को विद्यार्थियों को यह भी बताना जरूरी है शिक्षा का उद्देश्य इंजीनियर, चिकित्सक बनना नहीं एक अच्छे मानव का निर्माण करना है।
प्रधानाचार्य इंद्रपाल सिंह का कहना है कि यह घटना दुखद है, इस पर हम सभी को विचार करना होगा, जिसके लिए अभिभावक व स्कूल को मिलकर बच्चों को चुनौतियां का सामना करने के लिए तैयार करना पड़ेगा। उसके लिए केवल एक ही समाधान है बच्चों की मनोस्थिति को समझ कर उनको मजबूत बनाना। बदलते समय में बच्चे की जिस क्षेत्र में रुचि है, उसके लिए उनको मार्गदर्शित करना ही हम सब की जिम्मेदारी है।
अभिभावक मनोज कुमार का कहना है कि कोचिंग करने वाले बच्चों पर अभिभावक अनावश्यक रूप से दबाव न बनाएं। बच्चों को मानसिक तौर पर मजबूत बनाएं और कोचिंग सेंटरों को सिलेबस ऐसे बनाने चाहिए, जिससे बच्चों पर प्रेशर न बने और उनकी काउंसिलिंग करते रहना चाहिए। अभिभावक भी रोजाना अपने बच्चों से बात करें और उनका साहस बढ़ाने का काम करें। कोचिंग करने वाले बच्चों के साथ अभिभावकों में से कोई साथ रहे तो ज्यादा अच्छा है।