- गंगा खादर में गहराया चारे का संकट, खेतों में भरा पानी
- गंगा में उफान के चलते नदी के पार खेतों में किसानों का जाना हुआ बंद
- खतरे के निशान के बेहद करीब चल रहा गंगा का जलस्तर
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर/जलीलपुर/चांदपुर। भले ही मैदानी इलाकों में बादलों के बरसने की गति मंद हो चुकी है, लेकिन पहाड़ की बारिश से गंगा में उफान बरकरार बना हुआ है। जलस्तर में उछाल आने की वजह से बाढ़ के हालात बने हुए हैं। खादरवासियों को बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
बृहस्पतिवार को बिजनौर बैराज पर गंगा का जलस्तर 219.60 मीटर दर्ज किया गया जबकि बुधवार को 219.40 मीटर बना हुआ था। हालांकि हरिद्वार के भीमगोड़ा बैराज से सिर्फ एक लाख सात हजार क्यूसेक पानी ही छोड़ा गया, फिर भी बरसाती नदियों में ज्यादा पानी आने की वजह से बिजनौर बैराज तक आते आते गंगा उफान पर पहुंच रही है। उधर, बिजनौर बैराज से गंगा में एक लाख 37 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है।
बता दें कि पिछले कई दिनों से गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब बना हुआ है। क्योंकि खतरे का निशान 220 मीटर पर है, ऐसे में 219.60 मीटर जलस्तर रहना खतरे से ज्यादा दूर नहीं है। उधर गंगा का जलस्तर बढ़ा होने की वजह से खादर में लोग मुसीबत झेल रहे हैं। उधर, जलीलपुर क्षेत्र में गंगा के निकटवर्ती गांवों में 12 जुलाई से बाढ़ के हालात बने थे। करीब दस दिन तक गंगा का पानी आबादी व सड़कों पर चलता रहा। मंगलवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पानी बढ़ने लगा था। बुधवार को स्टेट हाईवे बहसूमा ठाकुरद्वारा पर, नारनौर व पांडवनगर पुलिस चौकी के बीच, जलीलपुर से रायपुर खादर, जलीलपुर सलेमपुर खादर, जलीलपुर से मीरापुर सीकरी आदि सड़कों पर पानी चलने लगा। पांडवनगर पुलिस चौकी व रायपुर खादर में पुलिया के निकट जलस्तर ऊंचा होने के कारण बाइक, ई-रिक्शा आदि छोटे वाहनों का आवागमन बंद हो गया था। हालांकि बृहस्पतिवार को अधिकांश सड़कों पर पानी कम हुआ है लेकिन खेतों में अभी भी पानी भरा है।
खादर में गहराया चारे का संकट
जिले में बालावाली से लेकर जलीलपुर तक खादर इलाकों के खेतों में पानी भरा हुआ है। ऐसे में चारे की फसल चौपट हो गई है या फिर चौपट होने की कगार पर है। ऐसे में किसानों के सामने चारे का संकट गहरा गया गया है। उधर, बालावाली से रावली तक गंगा के उस पार खेती करने वाले किसान अपने खेतों पर भी नहीं जा पा रहे हैं।