बिजनौर। जिले में नरभक्षी गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग ने सिकंदरपुर में पिंजरा लगाकर चार बकरी बांधी थीं। दो बकरियों को तो चोर पिंजरे का ताला तोड़कर चोरी कर ले गए और बाकी दो बकरियों को गुलदार खा गया। लेकिन आदमखोर गुलदार वन विभाग की पकड़ में नहीं आ सका।
जिले भर में साढ़े सात माह में 13 लोगों की जान गुलदार के हमले में चली गई। आदमखोर गुलदार को पकड़ने के लिए पिछले 20 दिन से ऑपरेशन चल रहा है, लेकिन गुलदार पकड़ से दूर हैं। गुलदार को पिंजरे में फंसाने या ट्रैंक्यूलाइज करने के लिए वन विभाग ने 20 बकरियां खरीदीं। अलग-अलग जगहों पर पिंजरों में या खुले में इन्हें बांधा गया। ऐसे में सिकंदरपुर के पास रामपुर में भी बकरी को पिंजरे में बांधा गया।
दो दिन पहले गुलदार तो पिंजरे के पास नहीं पहुंचा, लेकिन चोर पहुंच गए। चोरों ने दूसरी ओर से पिंजरे का ताला तोड़ा और बकरी को निकाल लिया। साथ ही पास में ही बंधी दूसरी बकरी भी चोरी हो गई। इसके अलावा खुले में बांधी गईं दो बकरियों को गुलदार खा गया।
एसडीओ ज्ञान सिंह ने बताया कि सुबह पहुंचने पर ताला टूटा हुआ मिला। चोरों ने ईंट से पिंजरे का ताला तोड़ दिया और बकरी को निकाल लिया था। वहां भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
- मादमखोर को लुभाने के लिए बकरी पर डाला गुलदार का यूरिन
बिजनौर। सिकंदरपुर के जंगलों में वन विभाग की टीम ने नरभक्षी को लुभाकर पकड़ने या मारने के लिए एक नया तरीका भी अपनाया है। जहां पिंजरों में, खुले में बिल्ली का खाना रखवाया गया है। वहीं बकरियों पर मादा गुलदार, नर गुलदार का यूरिन भी डाला गया है। ताकि गुलदार इसकी गंध से उस क्षेत्र में पहुंच जाए। साथ ही जाल लगे ट्रैक्टर, मचान पर शूटर और ट्रैंक्यूलाइज विशेषज्ञ तैनात कर दिए गए हैं। इसके अलावा कुछ जगहों पर बकरी बांधकर गहरे गड्ढे भी खोद गए हैं। ताकि बकरी के शिकार के लिए गुलदार आए तो वहां फंस जाए।