बिजनौर, कालागढ़। कालागढ़ में बाघ के हमले में पहले भी वनकर्मी अपनी जान गवां चुके हैं। कालागढ़ रेंज के जंगल खतरनाक बाघों के लिए जाने जाते हैं। बदलते परिवेश में बाघों के व्यवहार में आ रहे परिवर्तन से मानव आबादी के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के जंगल बाघ व हाथी जैसे जीवों के लिए अपनी अलग पहचान बनाए हैं। वनों में शांत भाव से विचरण करने वाले जीवों के व्यवहार में अचानक आए परिवर्तनों के चलते अब यह जीव वन कर्मियों पर ही हमलावर हो रहे हैं। जिसके चलते वन कर्मियों की सुरक्षा के लिए वन विभाग को ठोस कदम उठाने होंगे। इससे पूर्व कांदरू स्रोत क्षेत्र में वन कर्मी राकेश कुमार व कृष्ण पाल बाघ के हमलों में अपनी जान गंवा चुके हैं।
बुधवार की दोपहर घटी आज की इस घटना की सूचना मिलते ही कालागढ़ की एसीएफ डाॅ. शालिनी जोशी, वन क्षेत्राधिकारी नन्द किशोर रूवाली आदि ने मौके पर पहुंचकर सबसे पहले कर्मियों की सुरक्षा व उपचार की ओर ध्यान दिया। वहीं कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डाॅ. धीरज पाण्डेय ने गश्त के लिए बने सुरक्षा प्रोटोकाल का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। वनकर्मी की मौत से वन विभाग में शोक छाया हुआ है। गश्ती दल अपने अपने क्षेत्र में सतर्कता बरत रहे हैं।