पांच चिकित्सकों को बनाया नोडल अधिकारी, कार्रवाई शून्य
बिजनौर। कहने को तो जिले में चिकित्सकों को कमी है, लेकिन अप्रशिक्षित चिकित्सकों पर कार्रवाई करने के लिए पांच चिकित्सकों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। पांच नोडल अधिकारी होने के बावजूद भी जिले में कार्रवाई नगण्य है। ऐसा नहीं है कि स्वास्थ्य विभाग इससे अंजान है, फिर भी टीम कार्रवाई के नाम पर सिर्फ निरीक्षण तक ही सीमित है।
जिले में अप्रशिक्षित चिकित्सकों पर कार्रवाई करने के लिए पांच चिकित्सकों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। कुछ साल पहले तक एक चिकित्सक को ही नोडल अधिकारी बनाया जाता था। दो डिप्टी सीएमओ, एक एसीएमओ और दो एमओआईसी को नोडल बनाया गया है। जिले में अक्तूबर माह में 14 अप्रशिक्षित चिकित्सकों का निरीक्षण किया। जिनमें से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने चार पर ही कार्रवाई की है। इनमें से 10 को नोटिस देकर ही छोड़ दिया है। जितने नोडल अधिकारी बना रखे है, उस हिसाब से कार्रवाई शून्य है।
सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग में अप्रशिक्षित चिकित्सकों का नोडल अधिकारी बनने के लिए सिफारिश का खेल चल रहा है। कुछ चिकित्सक तहसील का नोडल इंचार्ज बनने के लिए सिफारिश करा रहे हैं। इनमें सीएचसी, पीएचसी पर तैनात एमओआईसी भी लाइन में सबसे आगे हैं।
नजीबाबाद, नगीना तहसील में नहीं हुई कार्रवाई
नजीबाबाद और नगीना तहसील में अक्तूबर महीने में न तो कोई निरीक्षण हुआ और न ही कोई कार्रवाई की। बिजनौर तहसील में पांच झोलाछाप का निरीक्षण किया। जिनमें से स्वास्थ्य विभाग ने एक पर एफआईआर और चार को नोटिस भेजे। चांदपुर तहसील में पांच निरीक्षण किए। जिनमें से तीन अस्पताल सील और दो झोलाछाप चिकित्सकों को कागज दिखाने के नोटिस दिए। जबकि धामपुर तहसील में स्वास्थ्य विभाग ने चार अप्रशिक्षित चिकित्सकों को नोटिस दिए।
अप्रशिक्षित चिकित्सकों का नोडल अधिकारी एक एसीएमओ को ही बनाया गया है। जबकि चार चिकित्सकों को उनके सहयोग के लिए तहसील का इंचार्ज बनाया बना हुआ है। क्योंकि एक अधिकारी सभी तहसीलों को नहीं देख सकता है। ज्यादा कार्रवाई करने के लिए ऐसा किया गया है - डॉ. विजय कुमार गोयल, सीएमओ