बिजनौर। यूं तो जिले में एएचटीयू थाना बने हुए दो साल हो चुके हैं। थाना बनने से दो साल पहले से यह यूनिट सेल के रुप मेें काम करती रही, लेकिन पहला केस अब दर्ज हुआ है। मानव तस्करी करने वाले गिरोह के पकड़े जाने के बाद थाने में पहला केस दर्ज हुआ। जिसे नंबर एक मिला है। फिलहाल इस थाने को अपना भवन अभी नहीं मिल पाया है।
जिले में 21 थाने थे, दो महिला थाना बनने के बाद संख्या 23 हो गई। अब एएचटीयू थाना बनाए जाने के बाद संख्या बढ़कर 24 हो गई। बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी और मानव तस्करी रोकने के मकसद से बनाए गए थाने को फिलहाल अपना भवन नहीं है। यह थाना पुलिस कार्यालय के एक कक्ष में संचालित किया गया है। दो साल पहले यह थाना बनाया गया, जबकि एएचटीयू यूनिट सेल के रुप में चार सालों से काम कर रही थी।
थाना बनाए जाने के बाद इसे सीसीटीएनएस से लिंक नहीं किया जा सका था। जनवरी 2022 में इसे लिंक किया, लेकिन तब से लेकर अब तक मुकदमा दर्ज करने की नौबत नहीं आई। बृहस्पतिवार को झारखंड से मानव तस्करी करने वाले गिरोह को पकड़ा गया तो एफआईआर दर्ज हुई।
सुबह 6 बजकर 29 मिनट पर इस थाने के कंप्यूटर में एफआईआर लिखी जा रही थी। दरअसल यह पहला केस था, जो कि थाना बनने के बाद दर्ज किया गया। प्रभारी निरीक्षक अजीत रौरिया ने बताया कि थाना बनने के बाद यह पहली एफआईआर दर्ज हुई है। एएसपी सिटी डॉ. प्रवीन रंजन सिंह ने बताया कि इस थाने में यह पहला केस दर्ज हुआ है जोकि इतिहास के पन्नों में दर्ज रहेगा।