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ट्रॉिलयों के नीचे बैठकर रात भर ठंड से िठठुरते हैं िकसान

Tue, 09 Jan 2018 11:29 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर
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ट्रैक्टर ट्राली के नीचे बैठकर रात गुजारते किसान। - फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में घने कोहरे, शीतलहर और पाले के बीच एक ओर से जहां घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है, वहीं शुगर मिल पर गन्ना लेकर जा रहे किसानों को खुले में रात गुजारनी पड़ रही है। मिल किसानों के गन्ने से करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाती हैं, लेकिन गन्ना लेकर यहां पहुंचने वाले किसान के लिए न तो अलाव की व्यवस्था की गई है और न ही शौचालयों का इंतजाम किया गया है। अमर उजाला टीम ने सोमवार रात बिजनौर शुगर मिल पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। हमारी टीम सोमवार रात करीब नौ बजे जिला मुख्यालय स्थित बिजनौर शुगर मिल में पहुंची। मिल में किसानों की ट्रैक्टर-ट्राली और बुग्गी केन यार्ड में लाइन में खड़ी थीं। किसान मिल के बनाए गए शेड में अपने लाए कंबल आदि ओढ़े बैठे थे। बिस्तर के नाम पर गन्ने की पत्ती पड़ी थी, वो भी किसान खुद लाए थे। शेड में बिजली का बल्ब तक नहीं जल रहा था। मिल परिसर में कहीं भी किसानों के लिए अलाव नहीं जल रहा था। गांव खेड़की के किसान सलीम, भूरा, कालू ने बताया कि जिस शेड के नीचे वे लेटे हैं, वह मिल प्रशासन ने पिछले साल ही लाखों रुपये की लागत से बनवाया है। लेकिन वहां 50 किसान भी आराम नहीं कर सकते हैं। शेड की टीन गली हुई है। बारिश तो छोड़ो, बरसता कोहरा भी उन्हें टीन के नीचे पानी से तर कर देता है। सरकार खुले में शौच न जाने के लिए तमाम अभियान चला रही है, लेकिन मिल में किसानों के लिए शौचालय तक नहीं बने हैं। भैंसा-बुग्गी लेकर करीब छह किलोमीटर दूर गांव पेद्दा से आए अखरीद ने बताया कि मिल में पशु को ठंड से बचाने के लिए कहीं बांधने या पानी पिलाने की कोई व्यवस्था नहीं है। नरोल्लापुर निवासी नईम ने बताया कि मिल में कभी कभी 14 घंटे तक रुकना पड़ता है। किसान न जाने कैसे-कैसे अपने पशु को चारा खिलाता है और पानी पिलाता है। मिल में जिस लाइन में बुग्गी आदि चलती हैं, वहां इतनी सफाई तक नहीं की पशु को बांध दें। वाहनों पर बैठकर खाना खाने को मजबूर जिस किसान की फसल से शुगर मिले करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाती हैं, उसके भोजन करने को बैठने या चाय पीने के लिए कैंटीन तक मिल परिसर में नहीं मिली। गांव हेमराज कॉलोनी निवासी कमल और देव गन्ने से भरी अपनी ट्रॉली के ऊपर बैठकर खाना खाते मिले। उन्होंने बताया कि मिल में किसान के बैठकर खाना खाने के लिए चार कुर्सी तक नहीं पड़ी हैं। ट्रॉली के नीचे बैठकर रात काट रहे किसान हेमराज कॉलोनी निवासी किसान अपनी ट्रॉली के पास नीचे कपड़ा बिछाकर बैठे दिखे। नरपाल सिंह, बलवंत सिंह आदि ने बताया कि मिल में रात को किसान के सोने की कोई व्यवस्था नहीं। अक्सर वे रात को अपनी ट्रॉली के नीचे ही कपड़ा बिछाकर सोते हैं। अगर बारिश हो जाए तो ट्रॉली के नीचे कीचड़ हो जाता है। मिल में ऐसी कहीं कोई जगह नहीं जहां किसान खुद को बारिश से बचा ले। मिल में किसान या पशु की तबीयत खराब हो जाए तो फिर उसका भगवान ही मालिक होता है। क्योंकि मिल में दवाई आदि की कोई व्यवस्था नहीं है। किसानों से बात कर सुधारेंगे व्यवस्था : जीएम केन मिल के जीएम केन राहुल चौधरी के अनुसार मिल में शौचालय व पशुओं को पानी पिलाने की व्यवस्था है। किसानों के लिए अलाव जलवाए जा रहे हैं। किसानों के लिए बनाए शेड की मरम्मत कराई जाएगी। किसानों से बात कर सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाएगा।
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