बिजनौर। विशेष न्यायधीश एससी/एसटी एक्ट अवधेेश कुमार ने गांव लखमनपुर में दो पक्षों के बीच में हुए संघर्ष में दोनों पक्षों के चार-चार व्यक्तियों को दोषी पाते हुए तीन-तीन वर्ष के कारावास और चार-चार हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
शासकीय अधिवक्ता शलभ शर्मा के अनुसार थाना नगीना दहेता के गांव लखमनपुर निवासी लीलावती ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका पति बाहर नौकरी करता है। उसका देवर करन सिंह ग्राम प्रधान है। रतन सिंह एवं मदन व इनका परिवार उसके परिवार से प्रधानी की वजह से रंजिश रखते हैं। पवन, मदन, चमन, रतन ने उसके पुत्र मोनू की हत्या कर दी थी। जिसका मुकदमा बिजनौर न्यायालय में चल रहा है।
इस मुकदमे में बयान बदलने के लिए उन पर इन लोगों ने दबाव बनाया। सात जून 2012 को शाम करीब साढ़े पांच बजे घर पर लीलावती उसका पुत्र अजीत उर्फ सोनू, जो मोनू हत्याकांड में गवाह हैं, घर के अंदर मौजूद थे। घर में रतन, चमन, मदन, पवन, अंकित उर्फ पप्पू उनके घर में घुस आए। मोनू की हत्या का मुकदमा वापस लेने को कहा। उनके द्वारा मना करने पर अजीत को मारपीट कर जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में अदालत ने चारों हमलावरों को दोषी पाते हुए तीन-तीन वर्ष के कारावास व चार-चार हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। दूसरे पक्ष के सतनाम, सोनू उर्फ अजीत, करन व छोटे ठेकेदार को दोषी पाते हुए तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।