कांवड़ यात्रा की ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे से होगी निगरानी
बिजनौर। अबकी बार कांवड़ यात्रा की सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से निगरानी की जाएगी। मोटा महादेव मंदिर पर कांवड़ यात्रा की व्यवस्थाओं को चाक चौबंद रखने के लिए कंट्रोल रूम बना दिया है। इसके साथ ही जिले को तीन सुपर जोन, छह जोन और 21 सेक्टर में बांटा गया है। जिससे सुरक्षा व्यवस्थाओं पर बारीकी से नजर रखी जा सके।
शिवरात्रि 26 जुलाई को है, जल्द ही जिले की सड़कों पर कांवड़ियों का रैला नजर आने लगेगा। कांवड़ियों की भीड़ सड़कों पर उमड़ने से पहले ही पुलिस ने सुरक्षा इंतजामों का खाका तैयार कर लिया है। खुद एसपी दिनेश सिंह और एएसपी सिटी डॉ. प्रवीन रंजन सिंह उत्तराखंड बॉर्डर से मोटा महादेव मंदिर तक कांवड़ मार्ग का मुआयना कर चुके हैं। कांवड़ यात्रा की व्यवस्थाओं को बनाने के लिए मोटा महादेव मंदिर पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। जहां हर समय पुलिस तमाम इंतजामों के साथ मौजूद रहेगी। एएसपी सिटी ने बताया कि इस बार जगह-जगह ड्रोन उड़ाकर कांवड़ यात्रा पर नजर रखी जाएगी।
वहीं, उत्तराखंड बॉर्डर पर भी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जिससे जिले में दाखिल होने वाले कांवड़ियों के जत्थों और भीड़ पर नजर रखी जा सके। बॉर्डर पर लगे सीसीटीवी कैमरों के आधार पर आगे मार्ग में व्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी। पांच कांवड़ मार्गों में करीब 150 सीसीटीवी लगाए जाएंगे, जोकि कंट्रोल रूम से लेकर लखनऊ पुलिस मुख्यालय से भी जुड़े रहेंगे।
संवेदनशील गांव में भी रहेगी पुलिस पिकेट
पुलिस किसी भी हाल में कोई कोताही बरतना नहीं चाहती है। कांवड़ मार्ग में पड़ने वाले ऐसे गांवों को भी चिह्नित किया गया है जो खास समुदाय की आबादी वाले हैं। इन गांवों मेें पुलिस बल तैनात रहेगा। जिससे कांवड़ियों के साथ कोई गलत व्यवहार नहीं कर पाए। इस बार वाहनों की रफ्तार पर भी पुलिस नजर रखेगी। क्योंकि तेज रफ्तार वाहनों की वजह से ही कई बार कांवड़ियों के साथ सड़क हादसा होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों को पुलिस धीमी गति से चलाने की हिदायत देती नजर आएगी।
813 पुलिसकर्मियों की लगी ड्यूटी
कांवड़ यात्रा में कुल 813 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसमें पुलिस अफसर से लेकर थाना प्रभारी, दरोगा और सिपाही भी शामिल हैं। साथ ही यातायात पुलिस डायवर्जन आदि की व्यवस्थाओं को बनाने के लिए तैनात रहेगी। कोटावाली नदी के पार भी बिजनौर पुलिस ने पिकेट बनाई है। जिससे यहां पानी का तेज बहाव होने पर कांवड़ियों के वाहनों का ख्याल रखा जा सके। हालांकि पैदल कांवड़िये पुल से होकर गुजरेंगे, लेकिन वाहनों को रपटे से गुजरना होगा। पहाड़ों पर बरसात के चलते रपटे पर कई बार तेज बहाव पानी आ जाता है।