बिजनौर। सूखे के प्रभाव की धरातल पर अर्थात फसलों के नुकसान स्थिति जाने के लिए जनपद में सर्वे हुआ। प्रशासन ने सूखे के संबंध में फसलों की कराई सर्वे रिपोर्ट शासन को भेज दी है। सर्वे रिपोर्ट में गन्ना पर 8 से 10 प्रतिशत और धान पर 12 से 15 प्रतिशत के बीच सूखे का प्रभाव है, जबकि जनपद में उत्पादित दलहन, तिलहन, मूंगफली आदि फसलों पर सूखे का असर शून्य है। प्रशासन की माने तो 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान पर सूखा प्रभावित मानने का नियम है।
जनपद में पौने तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना, धान की फसल के साथ दलहन, तिलहन, मूंगफली और पशुओं का चारा खड़ा है। इस बार बारिश कम होने से फसलों पर सूखे का प्रभाव था। शासन के निर्देश पर अधिकारियों व वैज्ञानिकों तथा कृषि विशेषज्ञों की टीमों ने जनपद में फसलों पर सूखे का प्रभाव देखने के लिए खेतों का सर्वे कराया। एडीएम वित्त एवं राजस्व ने जनपद, तहसील स्तर पर एसडीएम की टीमों का गठन किया गया। टीमों ने सूखे के प्रभावित फसलों का आकलन किया। यह सर्वे 12 सितंबर तक हुआ। सर्वे में धान में 12 से 15 प्रतिशत तथा गन्ने में 8 से 10 प्रतिशत सूखे का असर आया। रकबे की बात करें तो मात्र साढ़े पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलों सूखे की चपेट में आने का दावा सर्वे में किया गया। फसलों के सूखे सर्वे की रिपोर्ट शासन भेज दी गई है। सर्वे रिपोर्ट में जनपद के प्रभाव से बाहर है। 33 प्रतिशत या इससे ऊपर ही जनपद सूखे की श्रेणी में आ सकता है।
धान, गन्ना, दलहन व तिलहन का विवरण
गन्ना 2.25 लाख हेक्टेयर
धान 55343 हेक्टेयर
उड़द 2378 हेक्टेयर
अरहर 07 हेक्टेयर
मूंगफली 120 हेक्टेयर
तिलहन 1632 हेक्टेयर
पशुचारा 8000 हेक्टेयर
शासन को भेजी सर्वे रिपोर्ट - एडीएम
एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार ने बताया कि जिले में सूखे के सर्वे की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। किसी भी फसल में इतना नुकसान नहीं मिला कि उसे सूखा प्रभावित की श्रेणी में रखा जा सके। जिन किसानों की फसलों में 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान हुआ है, उसे ही इसका लाभ मिलेगा। अभी तक सर्वे के आंकड़ों के अनुसार कहीं भी 33 प्रतिशत तक नुकसान नहीं मिला।