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हाल-ए-जिला अस्पताल: 32 साल में बिजनौर जिले में पांच गुना बढ़े मरीज, चिकित्सक रह गए आधे

Thu, 01 Sep 2022 05:35 PM IST
Dimple Sirohi अमन कुमार शर्मा, अमर उजाला, बिजनौर

सार

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में 1990 में जिला अस्पताल में 300 मरीज तक इलाज कराने आते थे। अब जिला अस्पताल में इलाज कराने 1500 मरीज तक आ रहे हैं। 28 पदों स्वीकृत हैं वर्तमान में, केवल पांच चिकित्सकों की तैनाती
 
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मरीज को देखती चिकित्सक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सरकार ने बेड के हिसाब से कर्मी बढ़ाने का प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में पास किया है। बिजनौर जिला अस्पताल की ही बात करे तो 32 साल पहले जो पद सृजित हुए थे, उनके अनुरूप भी चिकित्सक तैनात नहीं है। जबकि मरीजों की संख्या पहले की अपेक्षा पांच गुना बढ़ गई है, चिकित्सक आधे रह गए। तीन दशक पहले जहां 27 चिकित्सक मिलकर 200 मरीजों का उपचार करते थे, अब एक-एक चिकित्सक को 200 से 250 मरीज तक देखने पड़ रहे हैं।
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बिजनौर जिला अस्पताल की शुरूआत 1990 में हुई थी। उस समय रोजाना करीब 300 मरीज तक इलाज कराने आते थे। अब अब 1500 मरीज तक अस्पताल में इलाज कराने पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में सीएमएस के पद सहित विशेषज्ञों के 28 पद हैं। जिनमें से 15 पदों पर चिकित्सकों की तैनाती हैं। इनमें से तीन चिकित्सकों का तबादला हो गया है। चिकित्सकों की कमी की वजह से इन्हें अभी रिलीव नहीं किया गया है। अस्पताल में चिकित्सकों की ओपीडी का समय सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक है। चिकित्सक कम होने से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। दवाई लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।

तीन साल से लगातार बढ़ी मरीजों की संख्या
जिला अस्पताल के चिकित्सकों की माने तो तीन सालों से लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मिली जानकारी के मुताबिक अस्पताल में तीन साल पहले करीब 700 मरीज ही पहुंचते थे। मगर अब संख्या 1500 तक पहुंच रही है।
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कम समय देने पर नाराजगी जताते हैं मरीज
मरीज को कम समय देने से कई बार मरीज और उनके परिजन अस्पताल में हंगामा कर देते हैं। कई बार अस्पताल में ऐसे मामले देखने को मिले हैं। समय कम देने पर मरीज कहते हैं कि डॉक्टर अच्छा नहीं है। जल्दी-जल्दी मरीजों को देख रहा है। जिसके चलते समय न देने से अस्पताल के चिकित्सकों को मरीजों की नाराजगी झेलनी पड़ती है।

एक मरीज को कम से कम पांच मिनट देने चाहिए
मरीज देखने का कोई मानक तो नहीं है। मगर चिकित्सक एक मरीज को अगर पांच मिनट का समय दे तो मरीज इससे संतुष्ट हो जाता है। मरीज को समय देने के बाद ही सही बीमारी का पता चल पाता है। मगर अब अस्पताल में चिकित्सक कम होने से मरीजों को जल्दी-जल्दी देखा जाता है।

विशेषज्ञ                स्वीकृत पद       कार्यरत पद        खाली पद
एनेस्थेटिस्ट               2                  0                   2
बाल रोग विशेषज्ञ        2                   1                   1
सर्जन                          2                    1                   1
फिजिशियन                2                    2                   0
ईएनटी सर्जन               1                    0                   1
चेस्ट फिजिशियन        1                    0                   1
त्वचा विशेषज्ञ             1                    1                    0
आर्थोपेडिक सर्जन        2                    2                   0
नेत्र सर्जन                    2                    2                   0
प्रभारी अधिकारी         1                     0                   1
पैथोलोजिस्ट               2                     1                   1
कार्डियोलोजिस्ट          1                     0                   1
डेंटल सर्जन                 2                     1                   1
ईएमओ                       4                     2                    2
रेडियोलोजिस्ट              2                     1                    1

जिला अस्पताल में तकनीकी साधन तो बढ़ रहे हैं। मगर मानवीय साधन लगातार घट रहे हैं। चिकित्सकों की कमी से जिला अस्पताल काफी समय से जूझ रहा है। एक बीमारी के कम से कम दो चिकित्सक होने चाहिए। जिससे मरीजों को कोई परेशानी न हो।  .....डॉ. अरूण कुमार पांडेय, सीएमएस
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