ई-स्टांप प्रकिया चालू होने के बाद से दफ्तर का स्टाफ बिजनौर शिफ्ट
21 साल पहले लाखाें की लागत से तैयार किया गया था भवन
संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर। धामपुर का उपकोषागार कार्यालय तीन साल से बंद पड़ा है। वर्तमान में इसमें केवल बेकार सामान भरा पड़ा है। जब से ई-स्टांप प्रक्रिया चालू हुई है, तब से कार्यालय भवन बदहाल स्थिति में है। यहां का स्टाफ बिजनौर शिफ्ट कर दिया गया है। वर्तमान में उपकोषाधिकारी का चार्ज तहसीलदार धामपुर पर है।
धामपुर में 26 अप्रैल 2002 में उप जिला अधिकारी कार्यालय के निकट लाखों की लागत से उपकोषाधिकारी कार्यालय भवन का निर्माण हुआ था। कार्यालय में उपकोषाधिकारी के बैठने, स्टांप को सुरक्षित रखने, डबल लॉक कक्ष, कर्मचारियों के कार्य करने के लिए करीब आधा दर्जन से अधिक कक्ष बने हैं।
इसका उद्घाटन तत्कालीन तहसीलदार उपकोषाधिकारी रामभरत तिवारी, वरिष्ठ कोषाधिकारी राकेश कुमार त्रिपाठी, जिलाधिकारी मारकंडेय सिंह और निदेशक कोषागार श्रीकांत सिन्हा ने किया था । पहले यहीं से लोगों को जमीनों की खरीद फरोख्त करने, हलफनामा बनवाने आदि के लिए स्टांप पत्रों को उपलब्ध कराया जाता था।
मगर, पिछले तीन सालों से प्रक्रिया में बदलाव आने से स्टांप पत्रों की बिक्री बंद हो गई। इनके स्थान पर अब ई-स्टांप चालू हो गए है। इसलिए यहां ताला लगाकर स्टाफ को बिजनौर शिफ्ट कर दिया गया है।
पुलिस के हवाले सुरक्षा का जिम्मा
कोषाधिकारी कार्यालय भवन पिछले तीन साल से बंद है। मगर, उप कोषाधिकारी कार्यालय और ट्रेजरी की सुरक्षा के लिए अभी भी पुलिस की तैनाती है।
ई-स्टांप चालू होने की वजह से अब यहां काम नहीं हो रहा है। हसीलदार से कार्यालय भवन की समुचित सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। कहा गया है कि कार्यालय भवन का उपयोग खत्म हो गया है तो वह सामान को बाहर निकाल कर खाली करें। ताकि इसका उपयोग किसी अन्य विभाग के संचालन में किया जा सके। - मोहित कुमार, एसडीएम