- वन्यजीव संगठन बोले - बाघ प्रजाति स्वभोजी होती है, लेकिन शावक का रखती है ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
कालागढ़। कार्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर में बाघिन अपने तीन बच्चों को खा गई। वन्यजीव संगठनों ने शासन से इस मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि बाघ प्रजाति स्वभोजी होती है, लेकिन नवजात शावकों का विशेष ध्यान भी रखती है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर में बाघिन ने 17 जुलाई को दो और 18 जुलाई को तीसरे शावक को जन्म दिया था। वन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि बाघिन अपने तीनों शावकों को खा गई। शावकों के बाड़े में दिखाई न देने पर वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। वन विभाग ने शावकों की तस्वीरें भी जारी नहीं की हैं। रेस्क्यू सेंटर में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी व चिकित्सकों के जांच पड़ताल के बाद भी तीनों शावक वहां नहीं मिल रहे। वाइल्डलाइफ वेलफेयर फाउंडेशन के प्रवक्ता अशोक कुमार एवं अरण्या व भारतीय वन्यजीव संरक्षण सोसायटी के सचिव नरेंद्र सिंह का कहना है कि बाड़ा काफी अधिक बड़ा होता है, हो सकता है कि बाघिन अपने शावकों को कहीं छिपा चुकी है। उसे खोजा जाए। अक्सर बाघ तो शावकों को खा जाता है, पर बाघिन के मामले में ऐसा कम ही होता है। हालांकि बाघ स्वभोजी जीव है, यदि शावक नहीं मिलते हैं तो इस मामले की जांच होनी चाहिए।
बाघिन को शावकों को उठाकर ले जाते देखा गया
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डाॅ. धीरज पांडेय का कहना है कि बाघिन को सीसीटीवी कैमरे में शावक को मुंह में उठाकर लेकर जाते हुए देखा गया है। लेकिन उनके शव आदि नहीं मिले हैं। अनुमान है कि स्वभोजी स्वभाव के कारण बाघिन अपने शावकों को खा गई है। अभी सभी पहलू देखे जा रहे हैं।