- मेडिकल अस्पताल में रोजाना पहुंच रहे 20 मरीज
- बच्चों में डायरिया की वजह से बढ़ रही निर्जलीकरण की समस्या
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। गर्मी बढ़ने से निर्जलीकरण के मरीजों की संख्या भी धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। कम पानी पीने की आदत लोगों के परेशानी बन रही है। मेडिकल अस्पताल में निर्जलीकरण के रोजाना 20 मरीज तक पहुंच रहे हैं। बच्चों में डायरिया होने से निर्जलीकरण की समस्या बढ़ रही है। अस्पताल में इस समय निर्जलीकरण के दो बच्चे भर्ती हैं।
अस्पतालों में अभी निर्जलीकरण के ज्यादा मरीज नहीं आ रहे हैं। हालांकि धीरे-धीरे निर्जलीकरण के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। मई के पहले सप्ताह में निर्जलीकरण के रोजाना करीब 10 मरीज तक पहुंच रहे थे। मगर अब 20 मरीज तक पहुंचने लगे हैं। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि गर्मी बढ़ने के साथ ही निर्जलीकरण की समस्या भी बढ़ने लगी है। बच्चे वायरल डायरिया के चपेट में आ रहे हैं। जिससे उन्हें निर्जलीकरण हो रहा है। इसके अलावा उल्टी, दस्त की समस्या भी दिखाई दे रही है। चिकित्सक बच्चों और बड़ों को गर्मी में सावधानी बरतने की सलाह दे रहें हैं। साथ ही बच्चों के रोटा वायरस का टीका लगवाने के लिए भी कह रहे हैं।
निर्जलीकरण के लक्षण
-बच्चों को रोते हुए आंसू नहीं आते हैं
-मुंह और जीभ सूख जाती है
-पेशाब कम आता है
निर्जलीकरण से ऐसे करें बचाव
-बच्चे और बड़े थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें
-नियमित रूप से तरल पदार्थों का सेवन करें
-बच्चे को ओआरएस पिलाएं, इससे पानी की पूर्ति हो जाएगी
-निर्जलीकरण की समस्या होने पर चिकित्सक से परामर्श लें
-बाहर तेज धूप में न जाएं
-शुद्ध पेयजल का प्रयोग करें
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गर्मी बढ़ने के साथ ही धीरे-धीरे निर्जलीकरण के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। खेत पर काम करते समय पानी साथ लेकर जाएं। क्योंकि तेज धूप में शरीर में पानी की खपत बढ़ जाती है। गर्मी में काम करने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। वहीं बच्चे भी निर्जलीकरण होने से अस्पताल में भर्ती हैं - डॉ. आरएस वर्मा, चिकित्सक, मेडिकल अस्पताल
मौसम बदलने से बच्चों में उल्टी, दस्त की समस्या बढ़ गई है। जिसकी वजह से बच्चों को निर्जलीकरण हो रहा है। ओपीडी में 50 प्रतिशत बच्चे उल्टी, दस्त और निर्जलीकरण के पहुंच रहे हैं। ऐसे में बच्चों को शीशी से दूध या पानी नहीं पिलाएं। बच्चों को तरल पदार्थो का अधिक दें - डॉ. विभू शर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ