टीम प्रभारी अंशु शर्मा ने बताया कि उन्हें गांव के महावीर सिंह से गाय गोबर से दीयों को बनाने की प्रेरणा मिली। करवा चौथ, दीपावली का त्यौहार नवंबर महीने में है। लेकिन उन्होंने दीयों, मूर्तियों को बनाना शुरू कर दिया है। - गोबर, ग्वार गम से तैयार होते हैं उत्पाद
समूह की महिलाएं बतातीं हैं कि गाय गोबर से दीपक, देवी देवताओं की मूर्ति बनाने के लिए गाय का गोबर और ग्वार गम के पाउडर की जरूरत होती है। इन्हें विलय कर उत्पादों को बनाया जाता है। वह प्रोडक्ट को खुले बाजार में नहीं बेचते । बल्कि तैयार कर ट्रेडिंग कंपनी को बेचते हैं। प्रत्येक चार दीयों की पैकिंग की कीमत 30 रुपये है। - प्रदेश की राज्यपाल ने भी की सराहना
एडीओ आईएसबी दीनदयाल सिंह बताते हैं कि नहटौर ब्लॉक के 1290 समूह में करीब 15 हजार से अधिक महिलाएं काम कर रही हैं। लेकिन शाहकरमपुर गिलाड़ी का गणेश समूह वन ब्लॉक-वन प्रोडक्ट के आधार पर काम कर रहा है। इस समूह को प्रोत्साहित करने के लिए शासन स्तर पर भेजा गया है। एक साल पहले जब प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल विदुरकुटी आईं थीं। तब इस समूह के प्रोडक्ट को राज्यपाल ने भी सराहा था।