- शनिवार की देर शाम गंगा में समा चुकी है मंदिर परिसर में मौजूद समाधि
- पिछले दिनों मंदिर की यज्ञशाला को भी अपने संग ले गई थी गंगा की धारा
- कटान रोकने के लिए लगाए गए पत्थर और किए गए इंतजाम हुए नाकाफी
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर/चंदक। महाभारत कालीन मां गलखा देवी मंदिर पर अब फिर से खतरा मंडराने लगा है। दरअसल, गंगा की धारा तेजी से कटान करते हुए मंदिर की तरफ बढ़ रही है। मंदिर परिसर में मौजूद एक समाधि भी गंगा में समा गई, जबकि कुछ दिन पहले मंदिर की यज्ञशाला को भी गंगा बहा ले गई थी। कटान रोकने के लिए अब तक किए गए सभी इंतजाम नाकाफी साबित हो गए।
मंडावर थाना क्षेत्र के खादर में बड़े स्तर पर गंगा की धारा भूमि कटान कर रही है। गलखा देवी मंदिर पिछले एक माह से लगातार गंगा कटान की जद में है। पिछले दिनों गंगा कटान के चलते मंदिर परिसर में बनी यज्ञ शाला गंगा में समा गई थी, जिसके बाद ग्रामीणों की मांग पर सिंचाई विभाग ने पत्थर लगवा दिए। पत्थरों के स्टड बनाने के बाद कुछ दिन तक मंदिर की भूमि का कटान रुका रहा, लेकिन शनिवार शाम से मंदिर के नजदीक बड़ी मात्रा में भूमि कटान शुरू हो गया। शनिवार रात मंदिर परिसर में स्थित एक संत की समाधि गंगा में समा गई। हालांकि जियोट्यूब और मिट्टी के कट्टों के सहारे कटान को रोकने का प्रयास निरंतर जारी हैं, जो गंगा के रौद्र रूप के सामने नाकाफी साबित हो रहा हैं।
हजारों बीघा गन्ने की फसल हो गई नष्ट
भूमि कटान के साथ साथ गंगा के उफनते पानी ने गंगा खादर के किसानों की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। गंगा खादर क्षेत्र के दर्जनों गावों की हजारों बीघा गन्ने की फसल पानी भरने के कारण खराब हो गई है। किसान धर्मेंद्र, राजू, किशन ने बताया कि किसानों को इस वर्ष बड़ी आर्थिक हानि हुई है। गंगा खादर के अधिकतर किसानों की फसल गंगा पार है। नदी पिछले दो माह से लगातार उफान पर होने के कारण किसान अपने खेतों पर नहीं जा पा रहे हैं। जिस कारण किसानों के सामने मवेशियो के लिए चारे के संकट पैदा हो गया है। चारे की खातिर कुछ ग्रामीण जान हथेली पर रखकर मोटर बोट से गंगा पार कर मवेशियों के लिए चारा ला रहे हैं।