बिजनौर में करीब 45 दिन बाद अगवा छात्र वासु घर तो नहीं लौटा पर उसकी लाश आते ही रामपुर बकली में कोहराम मच गया। उसकी अंतिम यात्रा प्रारंभ होते ही सदमे में उसकी मां पुष्पा बेहोश होकर गिर पड़ीं। उसके पिता सुनील के हाथ भी अर्थी को कंधा देते वक्त कांप उठे। गमगीन माहौल में सभी के आंखें भर आईं। सपा विधायक रुचिवीरा ने परिवारवालों काे सांत्वना दी।
रविवार को पोस्टमार्टम के बाद वासु के शव को टोकरी में रखकर परिजन घर ले गए। इससे पहले लोगों की भीड़ सुबह से ही वहां एकत्र थी। वासु का शव देखकर हर किसी का कलेजा भर आया। हर किसी की जुबान पर फुफेरे भाई राजकुमार की क्रूरता की कहानी थी। घर से जब वासु की अंतिम शुरू हुई, तो उसकी मां पुष्पा बेहोश होकर गिर गईं। तीनों बहनें नेहा, पारूल व प्रियांशी का भी बुरा हाल हो गया। पिता सुनील कुमार के बेटे की अर्थी को कंधा देते वक्त हाथ कांप उठे। वासु की अंतिम यात्रा जिधर से गुजरी लोग में उसमें शामिल होते गए। गंगा बैराज पर वासु के चाचा भूपेंद्र ने वासु की चिता को मुखाग्नि दी तो लोगों के आंसू छलक आए। हर कोई कह रहा था कि वासु का क्या कसूर था जो उसे इतनी बेरहमी के साथ मारा गया। वासु की बड़ी बहन कक्षा 12, में छोटी बहन पारूल कक्षा 11 व तीसरे नंबर की बहन प्रियांशी कक्षा सात में पढ़ती है। वासु सबसे छोटा था।
वह कक्षा छह का छात्र था। उसकी मौत से घर का चिराग ही बुझ गया।
हत्यारोपियों को कोई अफसोस नहीं
मासूम वासु का कत्ल करने वाले उसके फुफेरे भाई राजकुमार और उसके साथियों को अपने किए का जरा भी अफसोस नहीं है। शहर कोतवाली में चालान होने के बाद मेडिकल को ले जाते समय राजकुमार और राहुल से जब मालूम किया गया कि वासु का कत्ल करने का उन्हें कोई अफसोस है, तो राजकुमार हंसता रहा। उसने जरा भी मुंह नहीं खोला। वासु का कत्ल करने और अपहरण की साजिश रचने का आरोप अपने साथी राहुल पर लगाता रहा। राहुल सारे आरोप राजकुमार पर लगाता रहा। कहता रहा कि राजकुमार उसे फंसा रहा है। वासु का कत्ल किसने किया, इस पर भी दोनों एक दूसरे पर आरोप लगाते रहे। बाद में पुलिस के सख्ती करने पर यह बात सामने आई कि राजकुमार ने ही वासु का कत्ल किया। राजकुमार ने इस बात से इंकार किया कि सुनील ने वासु के पैदा न होने पर उसे गोद लिया था। राजकुमार ने कहा कि वह एक साल से सुनील के घर नहीं जा रहा था। राहुल ने फिरौती के लिए साजिश रची और वह साथ हो गया। वासु को अपहरण करने के थोड़ी देर बाद ही मार डाला था। यह काम करते हुए उनके हाथ नहीं कांपे।
पाठल से काट दिया था मासूम को
राहुल व राजकुमार ने वासु का कत्ल करते समय क्रूरता की सारी हदें पार कर दी। उसके शरीर के पाठल से तीन टुकड़े कर दिए थे। तीनों टुकड़ों को अलग-अलग दबाने का इरादा था। बाद में एक साथ तीनों टुकड़ों को दबा दिया। वासु का शव मिलते ही पुलिस वालों का भी कलेजा भर आया। राहुल के मुताबिक राजकुमार वासु का कत्ल करने के लिए पाठल अपने साथ लाया था। पहले टाई से गला घोंटकर वासु को बेहोश किया गया और जिंदा वासु के ही पाठल से तीन टुकड़े कर दिए। पाठल राजकुमार ने ही छिपाकर रखा है।
हड्डी का सैंपल लिया
वासु का पुलिस प्रशासन डीएनए टेस्ट कराएगा। पोस्टमार्टम होने के बाद वासु की हड्डी का सैंपल लिया गया है। सैंपल जांच के लिए रखा गया है। जरूरत पड़ने पर इसे आगरा या लखनऊ प्रयोगशाला भेजकर डीएनए टेस्ट कराया जाएगा।
घर का बुझ गया चिराग
बिजनौर। राजकुमार वासु का कत्ल करने के बाद निडर होकर घूमता रहा। उस पर किसी का शक नहीं गया। सुनील ने कभी ये नहीं सोचा कि बहन गीता से हुए विवाद को राजकुमार अपने दिल में समाए बैठा है। राजकुमार का नाम जब वासु के कत्ल में आया, तो सारा परिवार सहम गया। हर किसी की जुबान से ये ही निकला कि राजकुमार तूने ये क्या किया। किस जन्म का बदला लिया है। कोई नाराजगी थी तो उसकी मां व पिता से बदला ले लेता। वासु को उसने क्यों मार डाला।
तीनों दरिंदों की धुनाई
शहर कोतवाली से मेडिकल के लिए ले जाते समय तीनों दरिंदों को देख वहां मौजूद लोग अपना आपा खो बैठे। तीनों आरोपियों की लोगों ने जमकर धुनाई कर दी। लोग आरोपियों से पूछते रहे कि मासूम वासु को क्यों मारा है। पुलिस ने लोगों से जान बचाने को तीनों को एक दम गाड़ी में बैठा लिया ओर मेडिकल कराने ले गए। जिला अस्पताल में भी कुछ लोगों तीनों की पिटाई करने के फिराक में लग गए।
झाड़ियों में छिपाया था बस्ता
वासु का कत्ल करने के बाद आरोपियों ने उसके शव को जमीन में दबाने के बाद उसका बस्ता थोड़ी दूर पर झाड़ियों में छिपा दिया था। पुलिस को पहले आरोपी बरगलाते रहे। पुलिस ने जब सख्ती की तो राजकुमार व उसका साथी राहुल शव जहां छिपाया है वहां पुलिस को ले गए। शव बरामद कराने के साथ झाड़ियों से बस्ता भी बरामद करा दिया।
कत्ल करते समय साथ नहीं था लोकेश
पुलिस की माने तो लोकेश बाइक पर जरूर वासु को स्कूल से आते वक्त रास्ते से बैठा लाया था। इसके बाद वह साथ नहीं रहा। रास्ते में कार में सवार राजकुमार व राहुल के हवाले कर दिया और घर चला गया। राजकुमार व राहुल ने अपने साथ ले जाकर वासु का कत्ल किया। लोकेश को नहीं मालूम था कि वासु का कत्ल दोनों ने कहां किया है।
मां की गोद सूनी हुई और बहनों की आस टूटी
बिजनौर। करीब 45 दिन पहले अगवा छात्र वासु की हत्या का शनिवार को खुलासा होते ही उसके परिवार के सदस्यों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। गम इस बात है कि अपना ही खून दगाबाजी कर गया। आखिर इन रिश्तों पर कौन भरोसा करेगा कि अपना ही सबकुछ उजाड़ दिया। हत्यारोपी एक फुफेरे भाई के वारदात को अंजाम देते समय हाथ भी नहीं कांपे।वासु की हत्या से उसकी मां पुष्पा की गोद सूनी हो गई और बहनों की आस टूट गई। वासु की तीनों बहनों पारूल, नेहा और प्रियंका की इस बार रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने की हसरतें पूरी नहीं हुई। बहनों की ये उम्मीदें शनिवार को वासु का शव मिलते ही खत्म हो गई। वासु की हत्या से घर का चिराग ही बुझ गया।
रिक्शा चालक की रिहाई का मांग
बिजनौर। बैट्री रिक्शा चालक एसोसिएशन, अखिल भारतीय मानवाधिकार निगरानी समिति ने वासु के हत्यारों को फांसी देने की मांग की है। जेल भेज गए रिक्शा चालक की रिहाई की मांग की है। रविवार को बैट्री रिक्शा चालक एसोसिएशन ने जानी चौक स्थित जिला कार्यालय पर शोकसभा का आयोजन किया। उसके हत्यारों को फांसी देने की मांग की है। बैठक का संचालन गोपाल शर्मा ने किया। सुनील राजपूत, विकास त्यागी, पूनम शर्मा, तरुण त्यागी, मनोज चौधरी, एमएस त्यागी आदि रहे।
हत्याभियुक्तों के इरादे खौफनाक थे
बिजनौर। अगवा छात्र वासु के कत्ल का मुख्य हत्याभियुक्त राजकुमार और उसके साथियों के इरादे काफी खौफनाक थे। हत्यारोपी वासु के शरीर के कई टुकड़े करके उन्हें गंगा या किसी नदी में बहाना चाहता था। टुकडे़ रखने के लिए हत्यारोपी दो बैग अपने साथ घटनास्थल पर भी ले गए थे। डर की वजह से अपने इस मकसद में हत्यारोपी कामयाब नहीं हुए। हत्यारोपियों को पहले से ही अंदेशा था कि कोई सबूत मिल गया तो वे वासु के कत्ल में फंस जाएंगे।
14 जुलाई को स्कूल से घर लौटते समय सुनील के बेटे वासु (12) को अगवा करने की साजिश आरोपियों ने पहले ही रच ली थी। हत्यारोपी वासु का फुफेरा भाई राजकुमार और उसका साथी राहुल वासु का अपहरण करने के दौरान दो स्कूल बैग कार में रखकर ले गए थे। इनका इरादा था कि वासु का कत्ल करके उसके शरीर के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। शरीर के टुकड़ों को दोनों बैग में डाल कर ले जाकर कहीं नदी में बहा दिया जाए। हत्यारोपियों को लगता था कि वह इस केस में पहले पकड़े नहीं जाएंगे। अगर वे पकड़े भी गए तो वासु का शव नहीं मिलेगा। ऐसे में वह वासु के मर्डर के मामले में साफ बच जाएंगे। वारदात को अंजाम देने के बाद हत्यारोपी वासु के शरीर के टुकड़े टुकड़े करने का साहस नहीं जुटा सके। वारदात के दो दिन बाद यानि 16 जुलाई को जब आरोपी वासु के शव को जमीन में गड्ढा खोदकर दबाने गए थे, तब रात के अंधेरे में यह काम नहीं कर पाए थे। वासु की हत्या के दौरान शव के टुकड़े करने के लिए राजकुमार और राहुल पाठल अपने साथ ले गए थे। यह बात राहुल ने स्वीकार भी की है। यह सुन पुलिस टीम वालों के होश उड़ गए।