नूरपुर। रामडोल का जुलूस निकालने के रास्ते को लेकर प्रशासन व हिंदू संगठनों में सहमति न बनने के कारण रविवार को निकाला जाने वाला जुलूस स्थगित कर दिया गया। प्रशासन पिछले वर्ष हुए समझौते के अनुसार ही जुलूस निकलवाना चाहता था, जबकि हिंदू संगठन पुराने रास्ते से जुलूस निकाले जाने पर अड़े थे।
कई दौर की वार्ता के बाद भी सहमति न बनने पर रामडोल समिति के सदस्यों ने जुलूस स्थगित करने का निर्णय लिया और प्राचीन शिव मंदिर पर धरना देकर बैठ गए। विवाद को देखते हुए एसपी सिटी के नेतृत्व में भारी पुलिस और पीएसी बल मौजूद रहा तथा विवादित रास्ते को पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर बंद कर दिया।
नूरपुर में निकलने वाले परंपरागत रामडोल जुलूस को लेकर पिछले कई वर्षों से विवाद चला आ रहा है। वर्ष 2012 में बंजारन चौक पर एक समुदाय ने जुलूस को रोक दिया था। उस दौरान पुलिस ने किसी तरह से दोनों पक्षों को समझाकर जुलूस निकलवाया था।
वर्ष 2013 में भी काफी विवाद हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने जुलूस को उसी रास्ते से निकलवा दिया था। पिछले वर्ष एसडीएम राकेश यादव व तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक सत्यपाल सिंह की मौजूदगी में जुलूस निकालने के रास्ते में कुछ बदलाव किए जाने का लिखित समझौता हुआ था, जिसके बाद बदले रास्ते से जुलूस निकाला गया था।
पुलिस ने समझौते की प्रति को अभिलेखों में भी चस्पा कर दिया। इस वर्ष जुलूस के रास्ते को लेकर कई दिन से विवाद चल रहा था। प्रशासन द्वारा शुक्रवार को मामले को सुलझाने के लिए दोनो पक्षों की बैठक बुलाई गई थी, लेकिन कोई निर्णय नही निकल पाया था।
एसपी सिटी कल्पना सक्सेना एसडीएम चांदपुर राकेश यादव, सीओ महेश सिंह अत्री दो दिन से रामडोल समिति के सदस्यों को समझौते के अनुसार बने रास्ते से ही जुलूस निकाले जाने को मनाने में जुटे हुए थे, लेकिन बात नहीं बनी। रविवार को भी एसपी सिटी ने विधायक लोकेंद्र चौहान, सांसद डा. यशवंत सिंह की मौजूदगी में रामडोल समिति के सदस्यों से बात कर मामले को सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नही बनी।
समिति के सदस्यों अनिल कुमार कमल, पवन गोयल, नवीन, निर्मल जैन, धर्मेंद्र जोशी, बेगराज चौहान, कपिल देव, हिंजाम नेता जितेंद्र बैंस आदि ने कहा कि वर्षों से उसी रास्ते को लेकर जुलूस निकलता आ रहा है। प्रशासन ने समुदाय विशेष के दबाव में कुछ लोगो को लेकर समझौता करा लिया था जो कि उन्हे मान्य नही है।
उन्होने कहा कि यदि जुलूस परंपरागत रास्ते से नही निकलवाया गया तो वह जुलूस निकालेंगे ही नही। प्रशासन द्वारा पिछले वर्ष हुए समझौते के बाद बने रास्ते को बदलने की अनुमति न देने पर रामडोल समिति ने जुलूस स्थगित कर अनिश्चिति कालीन धरना देने का निर्णय ले लिया, जिसके बाद रामडोल का जुलूस नही निकाला जा सका और समिति सदस्य प्राचीन शिव मंदिर के सामने धरने पर बैठ गए।
उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन पुराने रास्ते से जुलूस निकाले जाने की अनुमति नही देता उनका धरना जारी रहेगा। इस दौरान सुरक्षा के लिहाज से भारी मात्रा में पुलिस पीएसी के साथ बाहरी जनपद का पुलिस फोर्स भी मौजूद रहा।
धरने को सांसद डा यशवंत सिंह और विधायक लोकेंद्र चौहान ने समर्थन करते हुए कहा - कि प्रदेश में जगह जगह हिंदुओं से भेद भाव हो रहा है।
नूरपुर। प्रशासन से वार्ता के दौरान सांसद यशवंत सिंह ने मीडिया कर्मियों को बाहर जाने को कह दिया, जिसके बाद मीडियाकर्मियों की उनसे काफी नोक झोंक हुई।
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-यदि रामडोल समिति के सदस्यों को पिछले वर्ष हुए समझौते के अनुसार बने रास्ते पर एतराज था तो उन्हें प्रक्रिया के तहत जिलाधिकारी के यहां प्रार्थना पत्र देना चाहिए था। समिति सदस्यों से पिछले वर्ष जो समझौता हो गया उसी के अनुसार जुलूस निकाले जाने को कहा गया था। प्रशासन का काम शांति व्यवस्था बनाए रखना है।
-राकेश यादव एसडीएम चांदपुर।