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कई माह से ठगों की तलाश में लगी थी एसटीएफ

Thu, 27 Dec 2018 11:22 PM IST
Deepak Sharma अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
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बिजनौर के शिवालाकलां में नोएडा एसटीएफ द्वारा कार के साथ दबोचे गए ठग। - फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में पकड़े गए वीरेंद्र और शैलेंद्र उर्फ सूरज मलिक दोनों ठग शातिर हैं। एसटीएफ कई माह से उनकी तलाश में लगी थी। दोनों के नंबर सर्विलांस पर लगा रखे थे, पर ये एसटीएफ के हाथ नहीं चढ़ रहे थे। येे लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे ले लेते थे। जिसका नंबर आ जाता था लोगों से      यह कहकर पैसा ऐंठ लेते थे कि उन्होंने ही उनकी नौकरी लगवाई है। नौकरी न लगने पर जो लोग पैसा मांगते थे, उन्हें धमकी देते थे।
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शिवालाकलां के गांव मझौला गुर्जर निवासी मेघराज ने अपने    ममेरे भतीजे को पुलिस में भर्ती कराने के नाम पर एक लाख रुपये व वीर सिंह से उसके बेटे नवनीत की पुलिस में भर्ती कराने के नाम पर एक लाख रुपये लिए थे। दोनों ने मुकदमे शिवालाकलां थाने में वीरेंद्र व शैलेंद्र मलिक के खिलाफ दर्ज कराए हैं। बिजनौर के मोहल्ला बुखारा निवासी बृजपाल सिंह से उसके बेटे मोहित व सोहित की पुलिस में भर्ती कराने के नाम पर दोनों ने दो लाख 80 हजार रुपये लिए। ब्रजपाल सिंह ने शहर कोतवाली में दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
एसटीएफ ने दोनों को दबोच लिया। दोनों के पास से ठगी किए गए एक लाख 65 हजार रुपये नगद, पांच एडमिट कार्ड, चार मोबाइल, दो कार बरामद की हैं। दोनों को दबोचने वाली टीम में एसटीएफ नोएडा के प्रभारी अक्षयवीर त्यागी, दरोगा ब्रह्मप्रकाश शर्मा, पुलिसकर्मी बबलू चौधरी, देवदत्त, मनोज कुमार, सुनील तोमर के अलावा शिवालाकलां थानाध्यक्ष अमन सिंह शामिल रहे।
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एक साथ 50 लोगों को झांसे में लेते थे दोनों ठग
बिजनौर में एसटीएफ नोएडा द्वारा दबोचे गए दोनों ठग वीरेंद व शैलेंद्र उर्फ सूरज मलिक नौकरी लगवाने के नाम पर पांच लाख रुपये लेते थे। वीरेंद्र लोगों को जाल में फंसाकर शैलेंद्र मलिक के पास ले जाता था। पकड़े गए ठगों ने एसटीएफ व पुलिस को बताया कि वह 25 से 50 युवक-युवतियों का पैसा एक साथ ले लेते थे और सारा पैसा हड़प जाते थे। एसटीएफ को सूचना मिली कि शैलेंद्र मलिक उर्फ सूरज मलिक बृहस्पतिवार को शिवालाकलां क्षेत्र में रतनगढ़ बस अड्डे के पास वीरेंद्र से मिलेगा। तभी पुलिस के साथ मिलकर एसटीएफ ने दोनों को दबोचा। पकड़े गए ठगों के पास से मिलिट्री हॉस्पिटल द्वारा जारी किए गए ऑरिजनल मेडिकल सर्टिफिकेट, ग्राम विकास अधिकारी व पुलिस भर्ती से जुड़े एडमिट कार्ड भी बरामद हुए हैं। दोनों ठग मिलकर काम करते थे। परिजनों को भी इनकी करतूतों के बारे में पता नहीं था।
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