नजीबाबाद-हरिद्वार मार्ग पर उत्तराखंड एसटीएफ द्वारा तस्करों से बरामद बाघ की खाल
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में कार्बेट टाइगर पार्क से लगे बिजनौर के जंगल में बावरिया गिरोह ने तीन बाघों का शिकार कर लिया और वन अधिकारियों को खबर तक नहीं लगी। उत्तराखंड एसटीएफ द्वारा एक बावरिया गिरोह के एक तस्कर को बाघों की खालों के साथ पकड़े जाने पर मामले का खुलासा हुआ है। तस्कर ने बताया कि बाघों का शिकार कार्बेट पार्क व बिजनौर के जंगल की सीमा से किया गया है। बिजनौर क्षेत्र में बाघों के शिकार की खबर से विभाग में हड़कंप मचा है।
रविवार की रात उत्तराखंड एसटीएफ ने सूचना मिली कि कुछ वन्य जीव तस्कर बाघों की खाल व अन्य अंगों को लेकर कही जा रहे हैं। उत्तराखंड एसटीएफ ने नजीबाबाद-हरिद्वार मार्ग पर रवासन नदी के पुल पर तस्करों की घेराबंदी की। इनमें से चार तस्कर रात के अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए, जबकि एक तस्कर को दबोच लिया। पकड़े गए तस्कर ने अपना रामचंदर उर्फ चंदर निवासी घोसियान बस्ती निकट बस स्टैंड भटिंडा पंजाब बताया।
उसने अपने साथियों के नाम भटिंडा निवासी मडिया उर्फ माडू, रामभगत, मुख्तार व हरियाणा के कालका निवासी हजारी बताए हैं। तस्करों के पास से पांच बाघों की खाल, नाखून, हड्डी बरामद हुई है। उत्तराखंड एसटीएफ को पूछताछ में रामचंदर ने बताया कि पांच में दो बाघों का शिकार कार्बेट पार्क में व तीन बाघों का शिकार बिजनौर सीमा व कार्बेट टाइगर पार्क की सीमा के निकट किया गया है। बिजनौर में शिकार की सूचना पर वन अधिकारियों के हाथ-पांव फूले हैं। उत्तराखंड अधिकारियों के साथ मिलकर जंगल में सबूतों की तलाश की जा रही है। डीएफओ सलील कुमार शुक्ला का कहना है कि कोटकादर संरक्षित वन क्षेत्र से बाहर है। इस कारण उन्होंने कोटकादर को चुना होगा। हो सकता है कि शिकार कार्बेट पार्क की सीमा के अंदर हुआ है। वहां से पार्क की सीमा नजदीक है। इसकी जांच कराई जाएगी।