बिजनौर में जिला जज पीके चौरसिया ने मुनीर के नाम पर व्यापारी से एक करोड़ की रंगदारी मांगने के आरोप में अंतरिम जमानत पर चल रहे अधिवक्ता विश्वनाथ शर्मा की जमानत मंजूर कर ली है। अधिवक्ता को 50-50 हजार रुपए के मुचलके पर इस शर्त पर छोड़ा गया है कि वह साक्ष्य से कोई छेड़छाड़ नहीं करेंगे। केस में सुनवाई दौरान हर तिथि पर उपस्थित रहेंगे।
स्योहारा के मुहल्ला मुसलिम चौधरियान निवासी शोभित जैन ने 18 जून को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अरिहंत एजेंसी के नाम से कारोबार करता है। 13 जून 2016 को शोभित को एक रजिस्टर्ड पत्र मिला। इसमें उससे मुनीर के नाम एक करोड़ की रंगदारी मांगी गई थी। न देने पर उसको जान से मारने की धमकी दी गई थी। 17 जून को उसके मोबाइल पर दो अलग अलग मोबाइल नंबर से मैसेज भेजा गया। इसमें 21 जून को रकम रात नौ बजे रोहित टेलर के घर देने को कहा गया था।
इस मामले में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद केस का खुलासा करते हुए पुलिस ने आरोपी अधिवक्ता विश्वनाथ शर्मा को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने अधिवक्ता को अंतरिम जमानत दे दी थी। मंगलवार को इस मामले में जमानत पर फाइनल बहस हुई। अधिवक्ता का कहना है कि कई वादों में पुलिस के विरोध में पैरवी के कारण उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है।