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एनआईए के डीएसपी को गोलियों से भूना

Mon, 04 Apr 2016 12:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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बदमाशों ने एनआईए अधिकारी तंजील अहमद को मारी गोली - फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर/नई दिल्ली में प्रतिबंधित संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े कई अहम आतंकवादी घटनाओं की जांच कर रहे एनआईए के एक सीनियर अफसर की बिजनौर में शनिवार रात में हत्या कर दी गई। परिवार के साथ एक शादी समारोह से कार में लौट रहे डीएसपी तंजील अहमद पर दो बाइक सवारों ने गोलियों की बौछार कर दी। इस घटना में उनकी पत्नी गंभीर रूप से जख्मी हो गईं जबकि पीछे बैठे उनके दो बच्चे सीट के नीचे छिप गए, जिससे उनकी जान बच गई। बदमाशों ने 9 एमएम की पिस्टल से तंजील को 24 गोलियां मारी और फरार हो गए। उनकी पत्नी को चार गोलियां लगी हैं। वह नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती हैं। तंजील अहमद पठानकोट आतंकी हमले की जांच कर रही टीम से भी जुड़े थे। उनकी हत्या में आतंकियों का हाथ होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा है।
बिजनौर के स्योहारा थाने के कस्बा सहसपुर में रहने वाले 42 साल के तंजील अहमद में अपनी चचेरी बहन की बेटी सदफ की शादी में शामिल होने के लिए शुक्रवार को दिल्ली से परिवार के साथ सहसपुर आए थे। रविवार को उन्हें दिल्ली लौटना था। शादी समारोह से शनिवार की रात करीब एक बजे तंजील पत्नी फरजाना, 15 साल की बेटी जिमनिश और 12 साल के बेटे शहबाज के साथ वैगन आर कार से सहसपुर जा रहे थे। रास्ते में ताल कटोरा के पास दो युवकों ने अपनी बाइक उनकी कार के आगे लगा दी। तंजील के कार रोकते ही बदमाशों ने उन पर 9 एमएम के पिस्टल से ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। बदमाश बाइक से सहसपुर की ओर फरार हो गए। बदमाशों के जाने के बाद तंजील के बेटे और बेटी ने शोर मचाया। इस बीच पीछे से कार में तंजील के बड़े भाई मोहम्मद रागिब परिवार के साथ आ गए। तंजील के बेटे और बेटी ने बुरी तरह से घायल अपने पिता और मां को ताऊ की कार में बैठाया। दोनों को स्योहारा की सीएचसी और बाद में मुरादाबाद के कॉसमास अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने तंजील को मृत घोषित कर दिया। मुरादाबाद में तंजील के शव का पोस्टमार्टम हुआ। पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, तंजील के शरीर से 12 गोलियां निकली है। नौ गोलियां आरपार हुई हैं और तीन उनको छूकर निकली हैं।
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घटना की सूचना मिलते ही पुलिस में हड़कंप मच गया। रात में ही एसपी सिटी एमएम बेग व एसपी देहात डॉ. धर्मवीर सिंह मौके पर पहुंचकर घटना के संबंध में जानकारी ली। डीआईजी मुरादाबाद ओंकार सिंह ने रविवार को मौके का मुआयना किया। एनआईए दिल्ली की टीम के साथ यूपी की एटीएस और एसटीएफ की टीम ने मौके पर पहुंचकर घटना की पड़ताल की। तंजील बीएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट थे। पांच साल पहले एनआईए की स्थापना के समय से ही उन्हें एनआईए में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया था।

बिजनौर धमाके और पठानकोट हमले की जांच से जुड़े थे
यूपी एटीएस के आईजी असीम अरुण के मुताबिक आतंकी घटना की बात से इनकार नहीं किया जा सकता। घटना के हर पहलू की जांच की जा रही है। तंजील कई आतंकी हमलों की जांच से जुड़े थे लेकिन इस बारे में आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। कहा जा रहा है कि वह फिलहाल बिजनौर धमाके की जांच कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक तंजील पठानकोट हमला मामले की जांच से भी जुड़े थे। जांच के लिए जब पाकिस्तानी टीम यहां आई तो तंजील ने संपर्क अधिकारी की भूमिका निभाई थी। उर्दू की गहरी समझ के कारण पठानकोट हमला मामले की जांच में भी उनकी सेवा ली गई थी। 

आतंकी कनेक्शन की आशंका की कुछ वजहें
- बिजनौर धमाके साथ कई संवेदनशील मामलों की जांच से तंजील का जुड़ा होना
- सामान्य अपराधी नहीं करते 9 एमएम की पिस्तौल का इस्तेमाल
- परिवार के अन्य सदस्यों को नहीं बनाया निशाना, इससे पारिवारिक रंजिश की आशंका खारिज
दो मिनट में दिया वारदात को अंजाम
बाइक सवार बदमाशों ने केवल दो मिनट में गोलियां बरसाकर घटना को अंजाम दिया। बदमाशों के निशाने पर तंजील ही थे। सबसे ज्यादा गोली उन्हें ही मारी। उनके बराबर की सीट पर बैठी पत्नी फरजाना को भी गोली लगी। पीछे बैठे बेटे व बेटी को बदमाशों ने कुछ नहीं कहा।

तंजील की सूझबूझ ने बचा ली बच्चों की जिंदगी
फोर्टिस अस्पताल पहुंचे तंजील के जीजा खुर्शीद ने बताया कि अंतिम समय में तंजील की सूझबूझ काम आई और उन्होंने दोनों बच्चों की जान बचा ली। जैसे ही तंजील पर हमलावरों ने फायरिंग की, उन्होंने पीछे बैठी बेटी और बेटे को फौरन नीचे झुकने और सीट के पीछे छुप जाने को बोला। इससे उनकी जान बच गई।
जांच में जुटीं 6 टीमें
मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए चार जांच एजेंसियों की 6 टीमें बनाई गई हैं। इनमें एनआईए और दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की एक-एक, यूपीए एसटीएफ और एटीएस की दो-दो टीमें शामिल हैं।
कोट
इस मामले में हमारी एनआईए के संबंधित अधिकारियों से बात हुई है। मामले की विस्तृत रिपोर्ट मंगाई गई है। हमारे अफसरों की टीम भी वहां गई है। विस्तृत जांच के बाद टीम रिपोर्ट हमें जल्द सौंपेंगी। सरकार इस तरह की घटनाएं बर्दाश्त नहीं करेगी। - राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री

अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर। एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद की हत्या की साजिश पहले ही रची गई थी। वारदात को अंजाम देने के लिए तंजील की भांजी की शादी समारोह की तिथि बदमाशों ने तय कर रखा था। इस सनसनीखेज वारदात में किसी नजदीकी का भी हाथ हो सकता है। 
एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद के सहसपुर आने-जाने के रास्ते से बदमाश अच्छी तरह वाकिफ थे। दुस्साहसिक वारदात को अंजाम देने के लिए बदमाशों ने ठिकाने लगाने का ऐसा रास्ता चुना, जहां कोई उन्हें बचा न सके। सूत्रों के मुताबिक तंजील अहमद की कार दो बार परिजनों को लेने गांव गई थी, तब कार पर कोई हमला नहीं हुआ। इससे साफ है कि बदमाशों को पूरा मालूम था कि कार में तंजील अहमद नहीं हैं। पुलिस मान रही है कि बदमाश बैंक्वटहाल के आसपास रहकर ही तंजील अहमद के बारे में पूरी जानकारी ले रहे होंगे। सहसपुर जाते वक्त बदमाशों ने तंजील अहमद पर वहां हमला किया, जहां रास्ता पुलिया के पास संकरा है। साथ ही रास्ते में बजरी और मिट्टी भी पड़ी थी। यहां गाड़ी को बहुत धीमा चलाना होता है। बदमाशों को पूरी तरह मालूम था कि कार में कौन है।  
पुलिस भी मान रही है कि तंजील के बारे में कोई जानकारी उनका नजदीकी ही बैंक्वटहॉल के पास से बदमाशों को दे रहा था। सूत्रों के मुताबिक बदमाशों के हमले के दौरान तंजील की कार सड़क पर पड़ी बजरी पर जा चढ़ी। बदमाशों ने वहां जाकर फिर से तंजील अहमद पर गोलियां बरसाईं। बदमाशों को घटना को अंजाम देने का जरा भी डर नहीं लगा। मौके से कुछ दूरी पर आबादी थी। सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश आसानी से फरार हो गए। 

एनआईए का दावा, ऑन ड्यूटी थे डीएसपी  
नोएडा (सौरभ श्रीवास्तव)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के डीएसपी तंजील अहमद घटना के वक्त ऑन ड्यूटी थे। ऐसा दावा खुद एनआईए ने किया है। ऐसे में सवाल उठता है कि कई बड़े आतंकवादी हमलों की जांच और कई जाली करेंसी के सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने वाले मोहम्मद तंजील बिना सुरक्षा के बिजनौर में कैसे घूम रहे थे। उन्हें जिस वक्त गोलियों से भूना गया उस समय उनके पास न तो गनर था और न ही उन्होंने सर्विस पिस्टल रखी हुई थी। इस घटना में गंभीर रूप से घायल उनकी पत्नी फरजाना को नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। एनआईए के आईजी संजीव कुमार के नेतृत्व में एक टीम फोर्टिस अस्पताल पहुंची। संजीव कुमार ने दावा किया कि तंजील अहमद की पोस्टिंग दिल्ली हेड क्वार्टर में थी और घटना के वक्त वह ऑन ड्यूटी थे। परिजनों का कहना है कि अगर उनके पास गनर होता तो संभवत: उनकी जान बच  जाती और हमलावर पकड़े जाते। इतना ही नहीं अगर हमलावरों को इस बात की जानकारी होती कि तंजील फूल प्रूफ सुरक्षा के साथ चल रहे हैं तो शायद उन पर हमला ही नहीं होता।

अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर। एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद को ठिकाने लगाने के लिए बदमाशों ने पहले से ही इलाके की रेकी कर रखी थी। बदमाशों को तंजीम अहमद की एक एक पल की जानकारी थी।
तंजील अहमद को ठिकाने लगाने से पहले बदमाशों ने पूरा इलाका पहले से ही देख रखा था। पुलिस मान रही है कि अगर बदमाश बाहर के हैं, तो उन्होंने एक नहीं कई बार इलाके की रेकी की होगी, तभी बदमाश आसानी से निकले होंगे। अगर बदमाश स्थानीय हैं, तो उन्हें घटना को अंजाम देने से भागने तक कोई परेशानी नहीं हुई होगी। बदमाश स्योहारा से लेकर सहसपुर के रास्ते में घात लगाए बैठे थे और तंजील अहमद के आने का इंतजार कर रहे थे। उनकी वैगनार कार को बदमाशों ने पहले ही पहचान कर रखी थी। तंजील अहमद के आते ही बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। पुलिस इस बात को लेकर हैरत में है कि बदमाशों ने इतनी आसानी से घटना को अंजाम कैसे दे दिया। उनका प्लान कितना पक्का था जो किसी को भनक तक नहीं लगी। बदमाशों के भाग जाने पर पुलिस लकीरें पीट रही है। 

4-5 गोली मारकर रुके और फिर बरसाई गोलियां  

गजेंद्र चौधरी
मेरठ। पठानकोट हमले की जांच से जुडे़ डीएसपी तंजील अहमद की हत्या की जानकारी लगते ही एसटीएफ व एटीएस के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। दोनों विभाग के अधिकारियों ने बारीकी से जांच पड़ताल की और डीएसपी हत्याकांड के चश्मदीद दोनों बच्चों से बातचीत की। डीएसपी के बच्चों ने बताया कि दोनों बदमाश चार-पांच गोली मारकर रुक गए थे। गाड़ी में देखा और फिर अंधाधुंध गोलियां बरसा दी। अधिकारियों का दावा है कि बदमाशों ने 9 एमएम पिस्टल इस्तेमाल की है। अफसरों ने अंदेशा जताया है कि समारोह से निकलते ही बदमाशों ने एक दूसरे को फोन किया। सटीक रैकी करके बदमाशों ने इस वारदात को अंजाम दिया है। 
लोकल शूटर हो  सकते हैं शामिल
आईजी एटीएस असीम अरूण का कहना कि उनकी प्राथमिक जांच में डीसीपी की हत्या करने वाले शूटर लोकल है। जिस तरह से बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया, उससे साफ जाहिर है कि लोकल बदमाश ही इस तरह की वारदात कर सकता है। स्थानीय पुलिस ने लोकल के कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने का काम भी शुरू कर दिया है। डीसीपी की पुरानी रंजिश किसी से है या नहीं, इसकी जांच भी चल रही है।
सर्विलांस में जुटी पुलिस टीम 
अधिकारियों ने बताया कि शादी समारोह और घटनास्थल से पुलिस की सर्विलांस टीम ने बीटीएस उठाया है। पुलिस सूत्रों की माने तो शादी समारोह से बदमाश डीसीपी की निगरानी में लगे थे। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आयी है। जिस पर पुलिस की लाइन शुरू हुई है।    

दिन भर जांच, पर निष्कर्ष पर नहीं पहुंची जांच टीमें

अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ। एनआईए अधिकारी तंजील अहमद की  की सनसनीखेज हत्या के मामले में एटीएस, एसटीएफ या एनआईए अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी हैं। एटीएस व एसटीएफ दोनों ही जांच एज़ेंसियों के एडीजी कानून-व्यवस्था दलजीत चौधरी ने बताया कि जांच टीमें सुबह ही मौके पर पहुंच गई थी। पर, अभी कोई ऐसी ठोस जानकारी हासिल नहीं हो सकी है जिसके आधार पर कोई निष्कर्ष निकाला जा सके। फिलहाल, दो बिंदुओं पर फोकस रखकर जांच की जा रही है कि हत्या के पीछे रंजिश है या किसी आतंकी संगठन ने इसे अंजाम दिया है। एटीएस के आईजी असीम अरुण का भी कहना है कि अभी इस मामले के तथ्य जुटाए जा रहे हैं।  नतीजे पर पहुंचने में समय लगेगा।
बकौल चौधरी तंजील के शरीर पर कुल 21 घाव हैं।  जिस आधार पर यह माना जा रहा है उन्हें कम से कम दस गोलियां मारी गई हैं। उनकी पत्नी के पेट में दो गोलियां लगी हैं और उन्हें गाजियाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। त़ंजील को डाक्टरों ने रात में ही मृत घोषित कर दिया था। चौधरी के मुताबिक, तंजील पर हमले की सूचना उन्हें रात करीब चार बजे मिली। इसके तुंरत बाद उन्होंने आईजी एटीएस असीम अरुण व आईजी एसटीएफ राम कुमार को मौके पर रवाना कर दिया। दोनों ही अधिकारी अपने साथ अपनी टीमों को भी लेकर बिजनौर पहुंच चुके हैं। एनआईए से पूछा गया तंजील से जुड़े प्रकरणों का ब्यौरा
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एडीजी ने बताया कि जांच टीमों ने एनआईए के अधिकारियों से उन मामलों की जानकारी और  जांच की स्थिति के बारे में पृूछा है, जो तंजील को सौंपे गए थे। एनआई ने बताया है कि तंजील पठानकोट मामले में पाकिस्तानी जांच दल के लिए एनआईए की ओर से लायजन आफिसर थे। वह बिजनौर के रहने वाले थे। पर, बिजनौर ब्लास्ट मामले की जांच से जुड़े नहीं थे। पहले यह सूचना आई थी कि वह बिजनौर ब्लास्ट मामले की भी जांच कर रहे थे।
 
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