बिजनौर में स्वास्थ्य विभाग की महिमा भी निराली है। जब चाहे, जिसको चाहे अभयदान दे दे, चाहे कितनी भी बड़ी अनियमितता क्यों न की हो। जी, हां, इस समय विभाग ने धामपुर पीएचसी से लापता हुए चेक से निकाली गई छह लाख रुपये के मामले की जांच को पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
इस मामले में न तो विभाग आरोपी एमओआईसी (मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज) व वरिष्ठ लिपिक से रिकवरी की और न ही उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले के बारे में पूछने पर विभागीय अधिकारी केवल पुलिसिया जांच की बात कहकर पल्ला झाड़ देते हैं।
जननी सुरक्षा योजना यानि जेएसवाई के तहत सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने पर लाभार्थी को 1400 रुपये का चेक दिया जाता है। धामपुर पीएचसी पर 17 नवंबर 2014 को योजना की चेकबुक से एक चेक गायब हो गया था। इस चेक को 17 दिसंबर 2014 को महाराष्ट्र के पुणे स्थित एसबीआई की शाखा में कैश कर लिया गया।
इस दौरान विभाग को चेक के विषय में कोई पता नहीं चला। 26 दिसंबर 2014 को बैंक स्टेटमेंट से चेक द्वारा छह लाख रुपये निकालने की बात का पता चला। सूचना पर विभागीय अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए और विभागीय जांच बैठा दी। जांच में प्रथम दृष्ट्या तत्कालीन एमओआईसी डा. पीके गुप्ता, लिपिक और एक फार्मेसिस्ट आरोपित हुए। इस प्रक्रिया में करीब एक सप्ताह लग गया।
इस दौरान विभागीय अधिकारियों की नियत बदल गई और उन्होंने विभागीय जांच को बंद कर दिया, जबकि पुलिस में चेक के गायब होने के मामले में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। अभी तक छह लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता के मामले की जांच का कोई पता नहीं है, कि जांच किस स्तर पर पहुंची।
जांच चल भी रही है अथवा नहीं, इस बारे में किसी को पता नहीं। हालांकि धामपुर पीएचसी से गायब हुए चैक को महाराष्ट की पुणे स्थित एसबीआई की शाखा में कैश किया गया था। खाते से 50-50 हजार रुपये की धनराशि दो खातें में ट्रांसफर की गई थी तथा चार लाख रुपये नकद निकाले गए थे।