बिजनौर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पोस्को कोर्ट मुमताज अली ने किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस द्वारा अदालत में भेजी गई फाइनल रिपोर्ट को निरस्त कर दिया है। अदालत ने तीनों आरोपियों को विचारण हेतु 17 मई को तलब किया है।
थाना हीमपुर में क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोरी के साथ 22 मार्च 2017 को सामूहिक दुष्कर्म की रिपोर्ट तीन लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई थी। कोर्ट में मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए बयान में किशोरी ने जंगल में दुष्कर्म होने की बात कही थी।
एसएचओ ने चार गवाहों के शपथ पत्रों के आधार पर इस मामले में कोई अपराध होना न पाए जाने की फाइनल रिपोर्ट प्रेषित की थी। उसने साथ में झूठी रिपोर्ट लिखाने के लिए किशोरी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति भी की थी।
पीड़िता की ओर से न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर कहा गया कि उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ है। पुलिस ने आरोपियों से हमसाज होकर गलत तौर से फाइनल रिपोर्ट दाखिल की है। उसने फाइनल रिपोर्ट को निरस्त कर आरोपियों को तलब करने की प्रार्थना की थी।
अदालत ने आदेश में कहा है कि पीड़िता ने कलमबंद बयान में गैंगरेप की घटना का समर्थन किया है। गवाहों ने मुलजिमों को गन्ने के खेत से निकलकर जाते देखने की बात कही है। आरोपियों के खिलाफ प्रसंज्ञान लिए जाने का पर्याप्त आधार है।
कोर्ट ने इस मामले में फाइनल रिपोर्ट को निरस्त करते हुए आरोपी इरशाद अहमद, उसके भाई वकार अहमद निवासी गांव मसीत और लईक अहमद निवासी ग्राम नायक नंगला को विचारण हेतु तलब किया है।