नगीना चौराहे पर एक व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में लाश मिलने से सनसनी फैल गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सीएचसी भेजा। घटना का पता लगने पर परिवार में कोहराम मच गया।
मौके पर पहुंचे परिजनों ने आपूर्ति विभाग के कर्मचारियों पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि पिता की मौत के बाद मिट्टी तेल की फुटकर दुकान बहाल कराने को लेकर वह कई माह से कार्यालय के चक्कर काट रहा था। उधर पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है।
मोहल्ला साहूबान निवासी अमित का शव शुक्रवार को नगीना चौराहे पास मिला। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर सीएचसी पहुंचाया। मृतक के चाचा सुनील कुमार अग्रवाल व चाची संध्या अग्रवाल ने आरोप है कि लगाया कि उनकी भतीजे ने जिला पूर्ति अधिकारी के उत्पीड़न से तंग आकर मौत को गले लगाया है।
वह काफी दिनों से मिट्टी के तेल के फुटकर लाइसेंस को बहाल कराने को लेकर विभाग के चक्कर काट रहा था। लाइसेंस बहाल करने के नाम पर लाखों रुपये की डिमांड की जा रही थी। चार दिन पहले उसने डीएम से शिकायत कर भी विभाग के कार्यशैली पर प्रश्न लगाए थे।
डीएम से उसने प्रार्थना पत्र में अपने पक्ष में लाइसेंस बहाल कराने की भी गुहार लगाई थी। डीएम दफ्तर में उसकी शिकायत का पत्रांक सख्या 439 है। डीएम के यहां दर्ज शिकायत के आधार पर जिला आपूर्ति अधिकारी ने उसे शुक्रवार को सुनवाई के लिए बुलाया था।
वह सवेरे ही बिजनौर के लिए निकल गया था। आशंका जताई है कि बिजनौर में जरूर अमित के साथ दुर्व्यवहार हुआ है, जिससे वह बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसने बड़ा कदम उठा लिया। उधर सीएचसी के चिकित्सक डा. राकेश बसंल का कहना है कि अस्पताल में आने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।
मौत के कारणों का पता पीएम रिपोर् ट से ही लगेगा। कोतवाल अजय कुमार सिंह का कहना है कि पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है। आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। एसडीएम सतेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि इस मामले में उनकी जिला पूर्ति अधिकारी सुनील कुमार से बात हुई।
उन्होंने बताया कि अमित अपने पिता के लाइसेंस को अपने पक्ष में बहाल कराने की जुगत में लगा था, लेकिन इस प्रकार का नियम न होने के कारण लाइसेंस बहाल नहीं हो सका। डीएसओ सुनील कुमार का कहना है कि अमित के पिता की मिट्टी तेल की फुटकर दुकान थी।
वह पिता की मौत के बाद दुकान अपने नाम कराना चाहता था, लेकिन शासनादेश में इस तरह की प्रक्रिया न होने के कारण उसकी दुकान बहाल नहीं की जा सकी। विभाग केवल उसे नई नियुक्ति में वरीयता दे सकता था। नई नियुक्ति की प्रक्रिया फिलहाल शुरू नहीं की गई थी। नई प्रक्रिया के लिए उसे इंतजार करने के लिए बोला गया था।