बिजनौर में जेल में सलाखों के पीछे एक कत्ल के मामले में भाई की जगह दस साल से सजा काट रहे बेगुनाह बाली को अब न्याय मिलने की आस बंधी है। जेल निरीक्षण के दौरान अफसरों के सामने यह मामला प्रकाश में आने पर बाली के फिंगर प्रिंट के नमूने लिए गए। दोनों भाइयों के फ्रिंगर प्रिंट की जांच का मिलान कराया जाएगा। इसके बाद तय होगा कि असली कातिल कौन है। कोर्ट के आदेश पर बाली के फिंगर प्रिंट के नमूने जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं।
नगीना देहात थाने के गांव साबूवाला निवासी धर्मपाल का 23 फरवरी 2001 को कत्ल कर दिया गया था। इस मामले में मृतक की पत्नी इंद्रा देवी और उसके भाई वीर बहादुर उर्फ पप्पू व शिव सिंह उर्फ गुड्डू समेत पांच लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। अदालत ने वीर बहादुर को छोड़कर सभी आरोपियों को धर्मपाल के कत्ल का दोषी मानते हुए 29 नवंबर 2003 को आजीवान कारावास की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने वीर बहादुर उर्फ पप्पू को को भगोड़ा घोषित करके गिरफ्तार करने के पुलिस को निर्देश दिए थे। पुलिस ने वीर बहादुर पर इनाम भी घोषित किया था।
28 अप्रैल 2006 को तत्कालीन नगीना देहात के एसओ आरके सिंह ने वीर बहादुर के बड़े भाई बल बहादुर उर्फ बाली को पकड़कर वीर बहादुर बना दिया। वीरबहादुर की जगह उसका धर्मपाल के कत्ल में उसका चालान कर दिया। बल बहादुर और उसके परिजन पुलिस से गुहार लगाई कि बाली वीर बहादुर नहीं है, पर पुलिस ने उसकी एक नहीं सुनी।
इस मामले को लेकर कोर्ट से लेकर अफसरों के यहां शपथ पत्र देकर अवगत कराया गया कि पकड़ा गया बाली बेकसूर है। बाली के पकड़े जाने के बाद वीरबहादुर घर नहीं लौटा। वह जिंदा है या मर गया यह भी किसी को मालूम नहीं है। बाली दस सालों से भाई की जगह कत्ल में सजा काट रहा है। उसे इंसाफ नही मिला। पिछले दिनों जिला जज पी के चौरसिया, डीएम बी चंद्रकला व एसपी उमेश कुमार श्रीवास्तव जेल का निरीक्षण करने पहुंचे। इन अधिकारियों के सामने बाली ने अपना दुखड़ा रोया। अफसरों की टीम ने इस मामले में बाली को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया।
एडीजे तृतीय संदीप जैन के आदेश पर जेल में बंद बाली के बृहस्पतिवार को फिंगर प्रिंट का नमूना लिया गया। इसे जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा गया है। जेलर आकाश शर्मा के मुताबिक जांच रिपेार्ट आने के बाद बाली व उसके फरार भाई वीरबहादुर के फिंगर प्रिंट की जांच का मिलान कराया जाएगा। धर्मपाल के कत्ल से पहले दोनों भाई किसी ओर मामले में पहले भी जेल में रह चुके हैं। वीरबहादुर के फिंगर प्रिंट की पहले से जांच रिपोर्ट है। जांच के मिलान से पता चलेगा कि बाली ही असली वीरबहादुर है या नहीं।