फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कब्रिस्तान, श्मशान की जमीन को लेकर विवाद

Fri, 12 May 2017 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
विज्ञापन
गुनियापुर में जमीन के विवाद को सुलझाते नायब तहसीलदार व एसएसआई। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
नजीबाबाद में क्षेत्र की फिजा एक बार फिर बिगड़ते-बिगड़ते बच गई। प्रशासन की सजगता से हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों में टकराव समय रहते टल गया। गांव गुनियापुर में कब्रिस्तान और श्मशानघाट की भूमि को लेकर आमने-सामने आए दोनों पक्षों ने उच्च न्यायालय के आदेशों तक मेढ़ से 10-10 फिट के फासले पर शव का अंतिम संस्कार करने पर सहमति जताई।
विज्ञापन


नजीबाबाद तहसील के गांव गुनियापुर में श्मशानघाट की जमीन खसरा संख्या 215 के रकबा 0.614 हेक्टेयर और कब्रिस्तान की जमीन खसरा संख्या 242 के रकबा 0.250 हेक्टेयर को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्ष के लोगों में कई वर्षों से विवाद चला आ रहा है। बृहस्पतिवार सुबह इस मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया, जब ग्रामीण शाहिद की मृत्यु होने पर मुस्लिमों ने उसका शव दफनाने के लिए कब्र खोदी। हिंदू समुदाय के लोगों अमित विश्नोई, रावेंद्र विश्नोई, विपिन विश्नोई  आदि का आरोप था कि मुस्लिमों ने जिस जगह कब्र खोदी है, वह श्मशानघाट की जमीन है। इससे पहले कि दोनों पक्षों के बीच मामला तूल पकड़ता, सूचना मिलने पर नायब तहसीलदार सीके त्रिपाठी, एसएसआई अमन सिंह, नीरज मलिक, एसआई सत्येंद्र सिंह मौके पर पहुंच गए।

नायब तहसीलदार ने दोनों पक्षों को सुना और छोटी-छोटी बातों पर एक-दूसरे खिलाफ खड़े होने से बचने की हिदायत दी। उन्होंने क्षेत्र में अमन-चेन कायम करने के लिए एक-दूसरे के दुख-सुख में काम आने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया जमीनी विवाद न्यायालय में विचाराधीन है। उच्च न्यायालय का आदेश आने तक दोनों पक्षों के  लोग एक-दूसरे की भावनाओं को सम्मान देते हुए शवों का अंतिम संस्कार करें।
विज्ञापन


ग्राम प्रधान धर्मेंद्र उर्फ सोनू की उपस्थिति में मुस्लिम पक्ष से अय्यूब अहमद, इफ्तखार, नौशाद अहमद, अब्दुल वाहिद, हिंदू पक्ष से धर्मेंद्र, अमित विश्नोई, विपिन विश्नोई ने मेढ़ से 10-10 फिट के फासले पर शव दफनाने अथवा जलाने पर सहमति जताई। इससे पहले विवाद के निपटारे के लिए क्षेत्रीय ग्रामीणों ने प्रशासन से दोनों आराजियों की पैमाइश की मांग की थी। उधर, विवाद के चलते शाहिद का जनाजा कब्रिस्तान तक पहुंचने में विलंब हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें