बिजनौर में बेसिक शिक्षा विभाग में एक शिक्षिका के अंतरजनपदीय तबादले ने विभाग में शिक्षकों की तैनाती में सेटिंग और मनमानी की बड़ी पोल खोल दी है। एक शिक्षिका करीब कई साल बाद रिलीव कराने के लिए स्कूल पहुंची तो शिक्षक उसे पहचान तक नहीं पाए। दरअसल, विभाग में सेटिंग से ही यह शिक्षक तीन बार चाइल्ड केयर लीव के अलावा चार साल तक अवैतनिक अवकाश पर रही और स्कूल पहुंची ही नहीं। विभाग इतना कहकर ही पल्ला झाड़ रहा है कि शिक्षिका को चार साल तक वेतन नहीं दिया गया है।
बलॉक कोतवाली देहात के प्राथमिक विद्यालय टांडा सिक्कावाला में नियुक्ति के आठ साल बाद पहुंची शिक्षिका आभा जैन ने स्कूल में सहायक अध्यापक होने का दावा करते हुए शिक्षक को अन्तर जनपदीय तबादला आगरा के लिए होने पर रिलीव करने को कहा तो स्कूल का शिक्षक मान सिंह भी भौंचक्का रह गया। कई साल पहले नियुक्ति के बावजूद अध्यापिका अपने मूल विद्यालय नहीं पहुंची थी। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते शिक्षिका की नियुक्ति कागजों में ही चलती रही। बेसिक शिक्षा विभाग की माने तो शिक्षिका आभा जैन की सेलरी का पिछले चार साल से भुगतान नहीं किया गया है। इस बीच शिक्षिका तीन बार चाइल्ड केयर लीव पर भी रही है। पिछले तीन साल से शिक्षिका अवैतनिक अवकाश पर चल रही थी। अब उसे आगरा के लिए रिलीव किया गया है।
शिक्षक बोले, पहली बार देखा शिक्षिका को
प्राथमिक विद्यालय टांडा सिक्कावाला के इंचार्ज अध्यापक मान सिंह ने बताया कि उन्होंने कई साल में पहली बार शिक्षिका को देखा है। उन्होंने बताया कि खंड़ शिक्षा अधिकारी देशराज सिंह वत्स व संकुल प्रभारी सुजाउददीन के दबाव के चलते शिक्षिका को स्कूल से रिलीव किया है। इससे पहले शिक्षिका कभी प्राथमिक विद्यालया टांडा सिक्कावाला में नहीं आई थी। बीएसए कार्यालय के वित्त एवं लेखाधिकारी संजय कुमार शर्मा के मुताबिक मामला उनसे पहले का है। उन्होंने बताया कि शिक्षिका आभा जैन की सेलरी का भुगतान नहीं किया गया है तथा उनकी उपस्थिति प्रपत्र भी कार्यालय को नहीं मिला है।