नींदडू़ में हकीमपुर नारायन उर्फ नंगला गांव में असामाजिक तत्वों ने आग लगाकर शनिवार की रात 15 दलित परिवारों का भूसा, लकड़ी, छप्पर तथा 25 बिटोड़े फूंक दिए। आरोप है कि रंजिश में लगाई गई आग से करीब ढाई लाख का नुकसान बताया गया है। राजस्व विभाग की ओर से लेखपाल ने मौका मुआयना कर नुकसान का ब्यौरा जुटाया।
रविवार को हकीमपुर नारायन उर्फ नंगला निवासी जयचंद, बलराम और भगवाना ने बताया कि फरवरी 2018 में अदालत के आदेश पर राजस्व विभाग की टीम ने पुलिस को साथ लेकर जेसीबी मशीनों से उनके आवास गिरवा दिए थे। ये आवास कई दशक पहले तालाब में काटे गए पट्टे की भूमि में बने थे। तहसील प्रशासन द्वारा पीड़ितों के लिए गांव से करीब आधा किलोमीटर के फासले पर ग्राम समाज की भूमि में चार टिनशेड डाले दिए गए थे। टिनशेड के आबादी से दूर और असुरक्षित होने के चलते पीड़ित परिवार गांव में ही इधर-उधर रहकर समय काट रहे थे। टिनशेड में 25 क्विंटल भूसा और लकड़ियां रखी थीं। टिनशेड के बराबर में योगेंद्र चौहान के खाली पड़े आवास में उसका 20 क्विंटल भूसा भरा था। आसपास ही 25 बिटोड़े लगे थे। पीड़ितों के अनुसार पिछली दो रातों में इक्का-दुक्का बिटोड़ों में आग लगाई गई थी, लेकिन शनिवार की रात किसी ने योजनाबद्ध तरीके से सभी भूसे, लकड़ी तथा बिटोड़ों में आग लगादी।
आग में जयचंद, बलराम, भगवाना, टोमेश, बिशन सिंह, प्रीतम सिंह, करन सिंह, रोहिताश, पुखराज, धर्मवीर, त्रषिपाल, दिलावर, हरपाल, धर्मपाल तथा योगेंद्र चौहान का ढाई लाख रुपये मूल्य का नुकसान हो गया। पीड़ितों का कहना है कि रंजिश में उन्हें नुकसान पहुंचाने तथा गांव से भगाने के इरादे से आग लगाई है। प्रधान ध्वज प्रताप सिंह ने इसकी सूचना तहसील प्रशासन को दी।
रविवार को लेखपाल आनंद कुमार ने मौका मुआयना कर आग से हुई क्षति का अनुमान लगाया तथा प्रशासन को वस्तु स्थिति से अवगत कराया। उधर, चौकी प्रभारी जितेंद्र कुमार का कहना है कि पीड़ित पक्ष की ओर से कोई तहरीर नहीं दी।