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पंचायतीराज विभाग में 40 लाख का पकड़ा गया घोटाला

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बिजनौर। पंचायतीराज विभाग में 40 लाख का घोटाला पकड़ा गया है। ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव विकास कार्यों के लिए आए करीब 40 लाख रुपये डकार गए हैं। शासन के पंचायतीराज सचिव की हिदायत पर की गई जांच में पंचायतीराज विभाग में अब तक का यह सबसे बड़ा घोटाला है। ग्राम प्रधान तथा पंचायत सचिव को मौके से गिरफ्तार किया गया है।
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नजीबाबाद ब्लॉक के गांव नारायणपुर रतन के प्रधान इफ्तिखार अहमद हैं। गांव में ऋषिपाल सिंह पंचायत सचिव रह चुके हैं। ऋषिपाल सिंह वर्तमान में पदोन्नति पाकर हल्दौर ब्लॉक में एडीओ आईएसबी (इंडस्ट्री सर्विस बैंकिंग) हैं। शासन के पंचायत सचिव को विकास कार्यों के लिए आवंटित धन में गोलमाल करने की शिकायत मिली थी। पंचायतीराज सचिव प्रमोद कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम को जांच कराने की हिदायत दी। जांच की कमान सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी ने स्वयं संभाली। रविवार को सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी, डीडीओ संतोष कुमार, व डीपीआरओ मनीष कुमार की टीम पूरे टेक्निकल अमले के साथ गोपनीय तरीके से गांव में जा धमकी। जांच टीम के आने की ब्लॉक अधिकारियों को भी भनक नहीं लगने दी गई। ग्राम प्रधान इफ्तिखार अहमद को मौके पर बुला लिया गया। सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी के अनुसार जांच बिंदुवार डोर-टू-डोर जाकर की गई है। डीपीआरओ मनीष कुमार के मुताबिक वर्ष 2016-2017 व 2017-2018 में ग्राम पंचायत में 131 शौचालय बनाने का लक्ष्य था। शासन से शौचालय बनाने के लिए 15 लाख 72 हजार रुपये आवंटित हुए थे। गांव में सीसी रोड निर्माण के लिए 40 लाख रुपये दिए गए थे। इस प्रकार शासन से गांव को विकास कार्यों के लिए 55 लाख 72 हजार रुपये मिले। डीपीआरओ के अनुसार जांच में यह बात सामने आई है कि गांव में करीब 60 प्रतिशत शौचालय नहीं बने और जो बने उनके निर्माण में मानक के अनुसार निर्माण सामग्री नहीं लगाई गई थी। सीसीरोड भी करीब 60 प्रतिशत नहीं बनाई गई। आरोप है कि प्रधान पंचायत सचिव ने सांठगांठ करके आवंटित पूरा पैसा निकाल लिया। दोनों विकास कार्यों के लिए आवंटित धन का करीब 60 प्रतिशत धन डकार गए हैं। सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी के अनुसार प्रधान व तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ मंडावली थाने में गबन की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। प्रधान इफ्तिखार अहमद को नारायणपुर रतन गांव से और तत्कालीन पंचायत सचिव व वर्तमान में एडीओ आईएसबी ऋषिपाल सिंह को हल्दौर से गिरफ्तार कर मंडावली थाने लाया गया है।

अभी और आ सकते हैं घोटाले के मामले
सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी के अनुसार नजीबाबाद ब्लॉक घोटालों का सेंटर बन गया है। ब्लॉक में पंचायत सचिव व ग्राम प्रधानों का घोटाला गैंग काम कर रहा है। प्रशासन को विकास कार्यों में गड़बड़ी कर बड़े पैमाने पर शिकायत मिल रही हैं। करीब आधा दर्जन गांवों की जांच चल रही है। इनमें बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। किसी को बक्शा नहीं जाएगा।
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दो सफाईकर्मी सस्पेंड
बिजनौर। सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी के अनुसार नजीबाबाद ब्लाक के गांव नारायणपुर रतन में दो सफाईकर्मी तैनात हैं। जांच में यह बात सामने आई कि दोनों सफाईकर्मी गांव में आते ही नही हैं। दोनों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।

पंचायतराज कर्मचारियों में खलबली
बिजनौर। नजीबाबाद ब्लाक की ग्राम पंचायत नारायणपुर रतन में घोटाले के मामले में तत्कालीन सचिव व वर्तमान में एडीओ आईएसबी को हाथों हाथ जेल भेजे जाने की खबर मिलते ही विभागीय कर्मचारियों में खलबली मच गई। छुट्टी के बावजूद अनेक पंचायत सचिव विकास भवन में चक्कर लगाते देखे गए।

जांच में बरती गई गोपनीयता
बिजनौर। प्रशासन ने नारायाण पुर रतन गांव में विकास कार्यों में घोटालों की जांच के मामले में पूरी सतर्कता व गोपनीयता बरती। जांच के लिए छुट्टी का दिन चुना गया। जांच अधिकारी गांव में एक साथ नहीं पहुंचकर आगे पीछे पहुंचे, ताकि किसी को जांच की बात लीक न हो सके। सीडीओ की रणनीति के चलते ही जांच में घोटाले के प्रथम दृष्टा दोषी मौके पर ही पकड़े जा सके।
बिजनौर। पंचायतीराज विभाग में घोटाले का यह पहला मामला नहीं है। डीपीआरओ मनीष कुमार के अनुसार इससे पहले मौहम्मदपुर देवमल ब्लॉक की ग्राम पंचायत खलीलुल्लापुर का प्रधान गबन के मामले में जेल भेजा जा चुका है।
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