बिजनौर। किसी मरीज को डेंगू होने पर प्राइवेट चिकित्सक अपनी जुबान नहीं खोलेंगे। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने चिकित्सकों की जुबान पर लगाम लगा दी है। साथ ही माना कि प्राईवेट चिकित्सक इन गंभीर मामलों में बेवजह अफवाह फैला रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की नजर में डेंगू का जिले में कही भी प्रकोप नहीं है। केवल छह लोगों को ही डेंगू पाया गया है।
जिले में डेंगू ने अपना कहर बरपा रखा है। छोटे से लेकर बड़ा शहर तक डेंगू की चपेट में है। कई लोगों की डेंगू से मौत भी हो चुकी हैं। कस्बा झालू में तो डेंगू ने खूब कहर बरपा रखा है। डेंगू की चपेट में आए मरीज सरकारी अस्पतालों की प्राइवेट चिकित्सकों का सहारा ले रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम डेंगू से बचाव के कोई उपाय नहीं कर रही। डेंगू के मरीजों को भी विभाग की टीम सामान्य वायरल बता रही है। प्राइवेट चिकित्सकों की वजह से ही कई डेंगू के रोगियों की जान बच पाई है। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी खामियों को छिपाने के लिए अब प्राइवेट चिकित्सकों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सीएमओं डा. राकेश मित्तल ने जिले के प्राइवेट चिकित्सकों की बैठक बुलाई। चिकित्सकों से कहा कि वे बेवजह डेंगू की अफवाह न फैलाएं। किसी को डेंगू के बारे में बताने का अधिकार केवल सरकार के पास है। किसी चिकित्सक ने अगर अब किसी रोगी को डेंगू बताया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। प्राइवेट चिकित्सकों से इस संबंध में सरकार को भेजने के लिए एक फार्म भरवाया गया है। सीएमओ डा.राकेश मित्तल ने प्राईवेट चिकित्सकों की बैठक करके उन्हें डेंगू के बारे में अफवाह न फैलाने की हिदायत देने की बात कबूली है। उन्होंने कहा कि जिले भर में 22 मरीजों की जांच कराई गई थी। उनमें केवल छह को डेंगू पाया गया है, बाकी सब को वायरल है। डेंगू से कोई नहीं मरा है। उन्होंने कहा कि डेंगू को लेकर बेवजह अफवाह फैलाई जा रही है। जो कि गलत है। झालू व अन्य जगह पर विभाग की टीम नजर रखे हुए हैं।
खून की जांच की रिपोर्ट मिलती है छह दिनों में
स्वास्थ्य विभाग की भी महिमा निराली है। विभाग की ओर से डेंगू व अन्य बीमारी से पीड़ित रोगियों की जो जांच हो रही है उनकी रिपोर्ट छह दिन में मिल रही है। प्राइवेट पैथोलॉजी लैब पर जांच की रिपोर्ट चंद घंटो में मिल रही है। मरीज प्राइवेट लैब पर ही अपने खून की जांच कराना पसंद कर रहे है। मरीज को क्या बीमारी है उन्हें लैब की रिपोर्ट में साफ बताया जा रहा है। डेंगू की चपेट में आए मरीज मेरठ, दिल्ली व मुरादाबाद की अस्पताल की ओर रुख कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने खून की जांच करने वाली लैब को भी निशाने पर ले लिया है। उनसे भी कहा जा रहा है कि किसी को डेंगू न बताए। स्वास्थ्य विभाग के अफसर कहते हैं कि किसी की खून की जांच में अगर किसी को एन एस वन व टू पाया जाए तो उसे डेंगू नहीं है। डेंगू कब होता है ये भी अफसर नहीं बता रहे।
एक चिकित्सक ने बचाई झालू के 20 रोगियो की जान
बिजनौर के एक प्रसिद्ध चिकित्सक की वजह से कस्बा झालू के करीब 20 डेगूं के रोगियो की जान बच पाई है। झालू के डेंगू के रोगियों ने इस चिकित्सक का ही सहारा लिया। चिकित्सक ने हालत गंभीर होने पर भी मरीज का हौसला बढाकर उनका उपचार किया। झालू में फैली बीमारी को लेकर ये चिकित्सक भी परेशान रहे। रात दिन ये चिकित्सक मरीजों के लिए मौजूद रहे । चिकित्सक के कुछ दिनों के लिए विदेश जाने पर मरीजों को मेरठ व मुरादाबाद जाना पड़ा।