अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश तिवारी ने प्रतीक टंडन को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी ससुर और चचिया ससुर की जमानत की अर्जी निरस्त कर दी है।
थाना नगीना निवासी गुलशनलाल टंडन ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनके बेटे प्रतीक टंडन की शादी राजस्थान निवासी राधिका टंडन पुत्री सरेंद्रपाल अरोड़ा से हुई थी। 25 अगस्त 2016 को प्रतीक ने नगीना स्थित बड़े मंदिर में जहर खा लिया था। तबीयत बिगड़ने पर दोस्तों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। प्रतीक टंडन की जेब से सुसाइड नोट मिला था, जिसमें उसने लिखा था कि उसके मरने का कारण उसकी पत्नी राधिका, सास सपना अरोड़ा, ससुर सुरेंद्रपाल अरोड़ा, चचेर ससुर प्रदीप अरोड़ा व साला धर्मेेश अरोड़ा हैं। प्रतीक ने लिखा था कि ये लोग उसके मां बाप को मरवाना चाहते थे और उसके पैसे से धर्मेश अरोड़ा का कर्ज उतारना चाहते थे। उसे अपना घर जंवाई बनाना चाहते थे। उसके मना करने पर उसे झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देते थे। राधिका अपने चाचा प्रदीप अरोड़ा के कहने पर तांत्रिक के फेर में फंस गई थी। पुलिस ने इस मामले में जांच करके दो बार एफआर लगा दी थी। जिला शासकीय अधिवक्ता महफूज चौधरी के अनुसार विधि विज्ञान प्रयोगशाला की जांच में प्रतीक के सुसाइड नोट पर उसके हस्ताक्षर मिलने की पुष्टि हुई थी। जिला जज ने प्रतीक टंडन के ससुर सुरेंद्रपाल अरोड़ा व चचिया ससुर प्रदीप अरोड़ा की जमानत का पर्याप्त आधार न पाते हुए उनकी जमानत याचिका निरस्त कर दी है।