बिजनौर। करीब दस साल पहले राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत करीब 62 फर्जी प्रसव दर्शाकर जननी सुरक्षा योजना की राशि समेत अन्य मदों में हुए लाखों के घोटाले में आरोपी तत्कालीन डिप्टी सीएमओ/चंदक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी, एएनएम और जिले के दो ग्राम प्रधानों से गाजियाबाद में सीबीआई की विशेष अदालत में पूछताछ हुई। यह जांच आरोपियों का पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रही है।
वर्ष 2010-11 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के अंतर्गत चंदक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मिशन के खाते में दस लाख 90 हजार रुपये की धनराशि हस्तांतरित की गई थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार चंदक पीएचसी के तत्कालीन चिकित्सा प्रभारी डा. सतीश चंद्रा ने तत्कालीन लेखा लिपिक दीपक कुमार के नाम से दो चेक जारी किए। दीपक ने बैंक से नकद 10 लाख 90 हजार रुपये की राशि निकाल ली थी। महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने कोई राशि प्राप्त होने से साफ इंकार कर दिया था। इस मामले में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक ने विशेष सचिव को 11 अक्तूबर 2012 को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि सीएमओ के अधीन कार्यरत प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. सतीश चंद्रा, डा. विक्रम सिंह, डा. रामकुमार तथा कनिष्ठ लिपिक दीपक कुमार को वित्तीय अनियमितता का दोषी पाया गया है। कनिष्ठ लिपिक के खिलाफ कार्रवाई व्यवहारित की जा रही है। शेष प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. सतीश चंद्रा, विक्रम सिंह, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंदक के प्रभारी डा. रामकुमार पर साक्ष्यों के आधार पर शासन स्तर पर निर्णय लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में तत्कालीन डिप्टी सीएमओ/प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. सतीश चंद्रा व लिपिक दीपक न सिर्फ सस्पेंड हुए थे, बल्कि सीबीआई की ओर से केस दर्ज होने पर इन्हें व कई एएनएम को जेल जाना पड़ा था। फिलहाल इस मामले की सीबीआई जांच चल रही है।
इस मामले में 28 जून को गाजियाबाद में सीबीआई अदालत में आरोपी एसीएमओ डा. सतीश चंद्रा, एएनएम, गांव नसीरी के पूर्व ग्राम प्रधान बलराम सिंह और गांव चंदपुरी के पूर्व ग्राम प्रधान अतरे सिंह के बयान दर्ज हुए। इसकी सुनवाई के लिए अगली तारीख 23 जुलाई है। इस मामले में डिप्टी सीएमओ डा. सतीश चंद्रा ने बताया कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है। उनका इस घोटाले से कोई लेना देना नहीं है। उस दौरान वे यहां पर कार्यरत नहीं थे।