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न्यायालय का फर्जी आदेश बनाने वालों पर मुकदमा

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न्यायालय का फर्जी आदेश बनाने वालों पर मुकदमा
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नहटौर। तीन वर्ष पूर्व न्यायालय के फर्जी आदेश से दो महिला सहित चार लोगों के खिलाफ दुष्कर्म और गाली गलौज कर मारपीट करने की रिपोर्ट दर्ज कराने वाले पांच लोगों के खिलाफ न्यायालय के आदेश पर नहटौर थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
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करीब तीन पूर्व गांव चौहड़पुर में राजेंद्र और भौगेंद्र पक्ष में घर के सामने कूड़ा डालने के विरोध में विवाद हो गया था। भौगेंद्र पक्ष की एक महिला ने 24 मई 2016 को न्यायालय में एक प्रार्थना पत्र देकर दुष्कर्म करने, गाली गलौज कर मारपीट करने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने की गुहार लगाई थी। थाने से आख्या जाने के बाद न्यायालय परिवाद के रूप में पंजीकृत करते हुए बयान के आदेश दिए थे। उक्त परिवाद को न्यायालय ने खारिज कर दिया था। उसके बाद 13 जुलाई 2016 को कुछ लोगों से हमसाज होकर न्यायालय का एक फर्जी आदेश थाना नहटौर में पहुंचवाकर कविता, नरेश, राजेंद्र, सविता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने इस मामले में गाली गलौच और मारपीट करने की चार्जशीट भी लगा दी। इस मामले में आरोपियों को रिपोर्ट दर्ज होने का पता करीब ढाई वर्ष बाद पता चला। उन्होंने 22 दिसंबर 2018 को न्यायालय से अपनी जमानत कराई। उसके बाद मामले की जांच पड़ताल शुरू हुई तो फर्जी आदेश का पता चला। इस मामले में कविता पत्नी राजेंद्र ने फर्जी आदेश से रिपोर्ट दर्ज कराने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की न्यायालय से गुहार लगाई। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने फर्जी आदेश बनाने के आरोप में उमा, भौगेंद्र और गांव रायपुर लकड़ा निवासी हरवेश, जितेंद्र और एक अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। कोतवाल जीत सिंह का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।
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