जिले में मोटे अनाज की खेती को दिया जाएगा बढ़ावा
बिजनौर। कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को मोटे अनाज की पैदावार बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही किसानों को मोटे अनाज के लाभ और उनके पौष्टिक का गुणगान करेंगे। इसके लिए कृषि विभाग गोष्ठी व किसान मेले आदि के माध्यम से किसानों को जो, ज्वार, बाजरा आदि की खेती करने पर बल देगा। संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2022-23 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रुप में मनाए जाने की घोषणा की है। भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र में यह प्रस्ताव रखा था, जिसका 70 से अधिक देशों द्वारा समर्थन किया गया। मिलेट्स अर्थात बाजरा, रागी, ज्वार, पोटेशियम, मैग्नीशियम, आयरन व फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। शासन के निर्देश पर कृषि विभाग जनपद बिजनौर में मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देगा। कृषि विभाग के अनुसार जनपद में जौ का लक्ष्य छह हेक्टेयर, चने का लक्ष्य चार हेक्टेयर था, लेकिन विभाग किसानों को इससे ज्यादा बुवाई कराने को गोष्ठी, मेले और बैठकों के माध्यम से प्रेरित करेगा। साथ ही किसानों को इनकी बुवाई से कम खर्च, अधिक उत्पादन केे बारे में बताएंगा, वहीं इस अनाज के सेवन से जनमानस को होने वाले लाभ का भी गुणगान करेंगे।
उत्सव, समारोह में प्रयोग में लाई जाएं मिलेट्स उत्पाद
उप कृषि निदेशक गिरीश चंद ने बताया कि जनमानस के पोषण स्तर में सुधार के लिए वैवाहिक कार्यक्रमों, उत्सवों व अन्य समारोहों में खाने में यथासंभव न्यूनतम एक खाद्य सामग्री मिलेट्स उत्पाद की प्रयोग में लाई जाएं, ताकि मिलेट्स के प्रति जनमानस के बीच जागरूकता उत्पन्न हो।
दशकों पहले हर घरों में होता मोटे अनाज का इस्तेमाल
बुजुर्ग मास्टर विजयपाल सिंह एवं धर्मवीर सिंह धनकड़ का कहना है कि तीन दशक पहले हर घर के भोजन में मोटे अनाज का इस्तेमाल हुआ करता था। रोजाना खाने में चना, मक्का, बाजारा, लोबिया, सोयाबीन, जई, ज्वार आदि का प्रयोग किया जाता था, जो सेहत के लिए बेहद मुफीद होता था। समय के बदलाव के साथ ही लोगों की खानपान की रुचि भी बदलने लगी
जनपद के किसानों से बाजरा, ज्वार, जौ का क्षेत्रफल व उत्पादन बढ़ाने के लिए सार्थक प्रयास किए जाएंगे। आम जनमानस के पोषण स्तर में सुधार के लिए इस ओर बढ़ना जरूरी है।
-गिरीश चंद उप कृषि निदेशक।