बिजनौर। पंचायतों में प्रशासकों के कार्यकाल की जांच में एक पंचायत को छोड़ सभी को क्लीन चिट मिली है। जांच अधिकारी को एक पंचायत के अभिलेख नहीं मिले। इसके लिए ब्लॉक के तत्कालीन एडीओ पंचायत को जिम्मेदार मानते हुए उपनिदेशक पंचायत बरेली को कार्रवाई की संस्तुति भेजी गई है।
पंचायतों का वर्ष 2015 का कार्यकाल समाप्त होने के बाद करीब छह माह एडीओ पंचायत प्रशासक रहे। ग्रामीणों ने इस अवधि में पंचायतों के खाते से खूब पैसा निकालने व अनियमितताओं के आरोप लगाए। शासन को शिकायत हुई। जिस पर कमिश्नर ने डीएम को जांच कराने के निर्देश दिए।
जिले में 1123 पंचायत हैं। डीएम ने सहसा 108 पंचायतों का चयन करके जांच जिला स्तरीय अधिकारियों से कराई। डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि सभी 108 पंचायतों की जांच रिपोर्ट आ गई है। जांच अधिकारियों को नूरपुर ब्लॉक की राजा का ताजपुर पंचायत को छोड़कर सभी तय काम हुए मिले हैं। सभी सचिवों ने कराए कामों के अभिलेख जांच अधिकारियों को उपलब्ध कराए।
ताजपुर पंचायत के नहीं मिले अभिलेख
डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि राजा का ताजपुर पंचायत की जांच रिपोर्ट के अनुसार पंचायत में निर्धारित कार्य मानक के अनुसार मौके पर हुए मिले हैं। पंचायत के अभिलेख नहीं मिले हैं। बताया गया कि पंचायत सचिव की कोरोना के कारण मृत्यु हो गई थी। डीपीआरओ के मुताबिक निवर्तमान सीडीओ ने अभिलेख नहीं मिलने के लिए नूरपुर ब्लॉक के एडीओ पंचायत को जिम्मेदार माना है। एडीओ का पहले ही बदायूं जिला में तबादला हो गया था। इसलिए कार्रवाई के लिए उपनिदेशक बरेली को संस्तुति की गई। डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि पंचायतों में शासन की प्राथमिकता वाले विकास कार्य हुए हैं। इनमें प्राथमिक विद्यालयों का कायाकल्प, सामुदायिक शौचालयों, पंचायत घरों आदि का निर्माण शामिल हैं।