21 मई को गजराज से लड़ाई में घायल हो गई थी चंचल हथिनी
वन अधिकारियों की उपस्थिति में शव विच्छेदन कर अंतिम संस्कार किया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
कालागढ़ (बिजनौर)। करीब 27 दिन पहले गजराज से लड़ाई में घायल हुई हथिनी चंचल की मौत हो गई। कालागढ़ की हाथीशाला में सोमवार को भोर में उसने अंतिम सांस ली। वन विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में पशु चिकित्सकों ने हथिनी का शव विच्छेदन कर अंतिम संस्कार कर दिया।
केंद्रीय काॅलोनी के जंगल में 21 मई को चंचल हथिनी और गजराज की लड़ाई हो गई थी। इसमें गजराज ने चंचल को गिरा दिया था। उसके पैर में चोट लगी थी, जिसका उपचार कार्बेट टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्साधिकारी कर रहे थे। उसके पैर में फ्रैक्चर हुआ था, जिससे उसे चलने में परेशानी थी।
उसका उपचार हल्द्वानी के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डा. हिमांशु पांगती, पश्चिमी वृत्त के डा. राहुल सती व डा. आयुष उनियाल कर रहे थे। रविवार को वह उठ न सकी। सोमवार की भोर में उसकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक डी नायक, उप प्रभागीय वनाधिकारी डाॅ. शालिनी जोशी व स्थानीय अधिकारी कालागढ़ पहुंचे। हथिनी के शव का विच्छेदन कर उसका अंतिम संस्कार किया गया।
शरीर के अंग भी खराब होने लगे थे
कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक डी नायक ने बताया कि हथिनी चंचल के पैर में फ्रैक्चर था। उठ नहीं पाने की वजह से शरीर के अंग भी खराब होने लगे थे। उसे पूरा उपचार दिया गया, लेकिन जान नहीं बचाई जा सकी।